रायबरेली में एक्टू का प्रदर्शन:1076 महिला कर्मियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन


                 रायबरेली में एक्टू का प्रदर्शन:1076 महिला कर्मियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन

रायबरेली में एक्टू का प्रदर्शन:1076 महिला कर्मियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन

रायबरेली में ऐक्टू (ACTU) ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन 1076 हेल्पलाइन की महिला कर्मियों के साथ हुई कथित पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी आह्वान के तहत किया गया। ऐक्टू के जिला सचिव राम गोपाल ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को लखनऊ में 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में कार्यरत युवतियों के साथ पुलिस प्रशासन ने कथित तौर पर क्रूर व्यवहार किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने प्रदेश सरकार के ‘मिशन शक्ति’ के दावों और उसके महिला विरोधी चरित्र को उजागर किया है। राम गोपाल ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले वर्ष 112 हेल्पलाइन में कार्यरत युवतियों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया था, उन्हें सड़कों पर घसीटा गया था। राम गोपाल ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाले नियोजन में अनियमितताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नौकरी के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की जाती है और कंपनियां मनमानी करती हैं। कर्मचारियों को कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता, भुगतान पर कमीशन लिया जाता है, और काम का बोझ अत्यधिक होता है। महिला कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी आम हैं। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा और सेवा की निरंतरता की गारंटी न होने के कारण इन कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। इंद्र बहादुर यादव ने बताया कि प्रदेश में 8 लाख से अधिक कर्मचारी आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। इसमें चिकित्सा क्षेत्र के पीजीआई, राम मनोहर लोहिया और सभी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। शिक्षा संस्थानों में भी 60% से अधिक कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में लाखों ऐसे कर्मचारी हैं जिनका छह माह से अधिक का वेतन बकाया है। केंद्र सरकार ने श्रम संहिताएं लागू कर नौकरी के जरिए बेहतर जीवन के सपने को ध्वस्त कर दिया है। देश की समूची प्रतिभा और श्रम शक्ति को उससे असहाय बनाकर पूंजीपतियों के चरणों में गुलामी के लिए फेंक दिया गया है। सैकड़ों वर्षों के संघर्ष और अनगिनत कुर्बानियों से हासिल अधिकारों को मोदी सरकार ने एक झटके में छीन लिया। 12 घंटे काम का कानून महिला कामगारों के लिए एक त्रासदी की तरह है। आर एस मौर्य ने कहा कि 1076 हेल्प लाइन की महिला कर्मचारियों के सवाल को समाधान कर दिए जाने का खूब शोर मचाया गया किंतु उनके किस सवाल का समाधान किया गया और उनकी आवाज सुनकर भी क्या प्रदेश भर में आउट सोर्सिंग कर्मचारी जिस संकट का सामना कर रहे हैं। उसका समाधान करने के लिए सरकार ने कोई ऐसा कदम उठाया जिससे कम्पनी या अन्य कंपनियों को कोई सरकार का डर रहे ? क्या सरकार ने उनका स्थायीकरण करने का कोई इरादा प्रदर्शित किया या उनके उत्पीड़न , शोषण तथा दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी को दंडित करने या कोई उच्च स्तरीय जांच के लिए कोई निष्पक्ष कमेटी का गठन किया। ज्ञापन में 2 अप्रैल 2026 को लखनऊ में प्रदर्शन कर अपने सवाल को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रही 1076 हेल्प लाइन की महिला कर्मचारियों के साथ हुए पुलिसिया व्यवहार के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को चिह्नित कर दंडित किए जाने 1076 की प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के द्वारा शोषण और दुर्व्यवहार की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित किए जाने,1076 की महिला कर्मचारियों को नियोजित करने वाली कम्पनी को उसके द्वारा समय से शासनादेश के अनुरूप नियमों का पालन न करने , अपनी जिम्मेदारियों के निर्वाह में लापरवाही बरतने के लिए उसे काली सूची में डालकर सेवा दे रही कर्मचारियों के स्थायीकरण की गारंटी करने व प्रदेश में लाखों की संख्या में आउट सोर्सिंग में कर्मचारी बेहद कम वेतन पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, बार बार घोषणाओं के बावजूद उनके वेतन कहीं भी समय से भुगतान नहीं किए जा रहे हैं। अभी भी प्रदेश के बहुसंख्य हिस्से में 5_ 6 या इससे अधिक समय का वेतन बकाया है। उसके त्वरित भुगतान के साथ स्थाई पदों पर स्थाई भर्ती की प्रक्रिया के जरिए लम्बे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के स्थायीकरण करने तथा प्रदेश में सभी महिला कर्मचारियों को 12 घंटे काम के नियम के दायरे से बाहर रखा जाए। उन्हें 8 घंटे ही काम पर नियोजित करने तथा चिकित्सा सेवाओं के अलावा सभी नियोजनों में रात्रि पाली में काम की बाध्यता समाप्त करने तथा प्रदेश में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 4 श्रम संहिताओं को लागू न करते हुए पुराने प्रचलित कानूनों को प्रभावी रखने की मांग की गई।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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