DniNews.Live

‘राम ने तोड़ा धनुष, परशुराम का क्रोध हुआ शांत’:CSJMU में गूंजा जय श्री राम, हनुमान कथा के समापन पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) का रानी लक्ष्मीबाई सभागार रविवार को भक्ति के सागर में डूबा नजर आया। श्री हनुमान कथा के आठवें और अंतिम दिन भगवान राम के विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु निहाल हो गए। जैसे ही संत विजय कौशल जी महाराज ने ‘धनुष भंग’ का वर्णन किया, पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही आठ दिनों से चल रही इस दिव्य कथा का विधि-विधान से विश्राम हुआ। पुष्प वाटिका का प्रसंग, मर्यादा पुरुषोत्तम के प्रथम दर्शन कथा के अंतिम सत्र की शुरुआत पुष्प वाटिका प्रसंग से हुई। महाराज जी ने बताया कि जब प्रभु राम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से पुष्प चुनने पहुंचे, तभी माता जानकी भी गौरी पूजन के लिए वहां आईं। यहीं सिया-राम का प्रथम मिलन हुआ। जानकी जी ने पूरी विनम्रता के साथ मां गौरी से अपने मन की कामना की। महाराज जी ने इस प्रसंग के जरिए युवाओं को संदेश दिया कि जीवन में ‘भेष, भोजन और भाषा’ की शुद्धता बहुत जरूरी है। उन्होंने अपील की कि आधुनिकता के दौर में भी हमें अपने संस्कारों और सद्गुणों की रक्षा करनी चाहिए। धनुष भंग और परशुराम का आगमन,भक्ति और शक्ति का मिलन कथा का सबसे रोमांचक पल ‘धनुष यज्ञ’ रहा। महाराज जी ने विस्तार से सुनाया कि कैसे प्रभु राम ने गुरुदेव, माता-पिता और महादेव को प्रणाम कर भारी-भरकम शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाई और उसे पल भर में तोड़ दिया। धनुष टूटने की टंकार सुनकर जब परशुराम जी प्रचंड क्रोध में यज्ञ मंडप पहुंचे, तो पूरा वातावरण शांत हो गया। हालांकि, प्रभु राम के सौम्य रूप और उन्हें पूर्ण अवतार जानकर परशुराम जी का क्रोध शांत हो गया और उन्होंने नतमस्तक होकर भगवान का वंदन किया। जनकपुर में गूंजी शहनाई, चारों भाइयों का हुआ विवाह धनुष टूटने के बाद राजा जनक ने अयोध्या नरेश राजा दशरथ को भव्य बारात लाने का न्योता भेजा। महाराज जी ने बताया कि दशरथ जी के जनकपुर पहुंचने पर न केवल राम-सीता, बल्कि चारों भाइयों का विवाह हुआ।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *