रामपुर रजा पुस्तकालय में रामनवमी के अवसर पर “भगवान श्रीराम के जीवन एवं आदर्शों पर विशेष प्रदर्शनी” का उद्घाटन किया गया। पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र और वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, गजरौला की प्रो. मधु चतुर्वेदी ने इसका उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी भगवान श्रीराम के जीवन, मर्यादा, त्याग और धर्म के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। इसमें दुर्लभ चित्रों, पांडुलिपियों और साहित्यिक स्रोतों का उपयोग किया गया है, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आदर्श जीवन मूल्यों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रदर्शनी में विभिन्न भारतीय भाषाओं में रचित रामायण की दुर्लभ प्रतियां शामिल हैं। इनमें कम्ब रामायण, कृत्तिवास रामायण, गिरिधर रामायण, मैथिली रामायण और भानुभक्त रामायण जैसी महत्वपूर्ण कृतियां प्रदर्शित की गई हैं। रामचरितमानस की चुनिंदा चौपाइयों को भी कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। विशेष आकर्षण के तौर पर फारसी पांडुलिपि वाल्मीकि रामायण से लिए गए लघु चित्रों का प्रदर्शन किया गया है। कुल 258 दुर्लभ चित्रों में से चयनित चित्र भारतीय कला की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं। इस अवसर पर निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी प्रदर्शनियां नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में सहायक होंगी और भारत की विविधता, सहिष्णुता व समन्वय की परंपरा देश की सबसे बड़ी शक्ति है। कार्यक्रम का संचालन शाजिया हसन ने किया। यह प्रदर्शनी 24 मार्च से 4 अप्रैल 2026 तक आमजन के लिए खुली रहेगी।

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