रामनवमी के अवसर पर मथुरा में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने रामस्वरूप धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान ठाकुरजी ने अपनी बांसुरी को विराम देकर धनुष-बाण धारण किए। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान का विधिवत पंचामृत अभिषेक किया गया। घी, दूध, दही, शहद और बूरा से किए गए इस अभिषेक के बाद ठाकुरजी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का स्वरूप धारण किया। इस दौरान मंदिर परिसर “जय श्रीराम” और “राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों का मानना है कि यह दिव्य झांकी भगवान के विभिन्न अवतारों के एकत्व का अनुभव कराती है। उनके अनुसार, श्रीकृष्ण और श्रीराम एक ही परमात्मा के अलग-अलग स्वरूप हैं, जो धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। रामनवमी के अवसर पर पूरे मथुरा में उत्सव का माहौल रहा। शहर के विभिन्न मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया था। विशेष पूजा-अर्चना के साथ राम जन्मोत्सव मनाया गया। जगह-जगह भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिससे ब्रज क्षेत्र भक्तिमय हो गया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने इस दिव्य झांकी के दर्शन कर अपनी आस्था व्यक्त की। मथुरा में प्रकट हुआ यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।

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