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राज बब्बर चुनाव अफसर से मारपीट में बरी:30 साल पहले लखनऊ में केस दर्ज हुआ, अटल बिहारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था

यूपी कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद राज बब्बर को लखनऊ की MP/MLA कोर्ट ने बुधवार को बड़ी राहत दी। उन पर साल-1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज सभी मुकदमों को खारिज करते हुए बरी कर दिया। इससे पहले विशेष अदालत ने राज बब्बर को 7 जुलाई, 2022 को दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। आज बरी होने पर राज बब्बर ने कहा- मैं देश के लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखता हूं। मैं संविधान, लोकतंत्र की रक्षा और जनता के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करता रहूंगा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के खिलाफ लड़ा था चुनाव
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1996 में लखनऊ लोकसभा से भाजपा के प्रत्याशी थे। उनके खिलाफ समाजवादी पार्टी ने पहली बार राज बब्बर को उतारा था। मतदान के दिन एक मतदान केंद्र पर फर्जी वोटिंग को लेकर चुनाव अधिकारी से राज बब्बर का झगड़ा हो गया था। इसके बाद चुनाव अधिकारी ने लखनऊ के वजीरगंज थाने में राज बब्बर के खिलाफ मारपीट और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले का ट्रायल लखनऊ की MP/MLA कोर्ट में चल रहा था। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी सजा पर लगाई थी रोक
इससे पहले विशेष अदालत ने 7 जुलाई, 2022 को राज बब्बर को दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा और 8,500 रुपए का जुर्माना लगाया था। इसके बाद राज बब्बर ने सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका लगाई थी। इस पर कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे लगा दिया था। इससे उन्हें चुनाव लड़ने में राहत मिल गई थी। लेकिन, तब केस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। राज बब्बर बोले- राजनीतिक दुर्भावना से कराई गई थी FIR
वर्तमान में राज बब्बर कांग्रेस पार्टी में सक्रिय हैं। केस से बरी होने पर राज बब्बर ने खुशी जाहिर की। कहा- उस समय के राजनीतिक माहौल में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के उद्देश्य से मुझ पर इस प्रकार की कार्रवाइयां की गईं। ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण थीं। मैं कांग्रेस पार्टी का सिपाही हूं। देश के लोकतंत्र और संविधान में अपनी आस्था रखता हूं। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भी इस फैसले को न्याय की जीत करार दिया। कहा कि इससे साबित होता है कि 1996 में राज बब्बर की लोकप्रियता से डर कर विपक्ष ने उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश की थी। ————————– ये खबर भी पढ़ें- शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर चार्जशीट दाखिल होने तक रोक, बटुकों से यौन शोषण केस में हाईकोर्ट का फैसला शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जमानत बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। यह फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने दोपहर बाद 3.45 बजे सुनाया। पढ़ें पूरी खबर…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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