यूपी में शिक्षामित्रों को इसी महीने से 18 हजार मिलेंगे:अनुदेशकों को भी बढ़ा मानदेय मिलेगा; सीएम योगी का ऐलान
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यूपी में शिक्षामित्रों को इसी महीने से 18 हजार मिलेंगे:अनुदेशकों को भी बढ़ा मानदेय मिलेगा; सीएम योगी का ऐलान
सीएम योगी ने वाराणसी में शनिवार को 1.42 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया। कहा- इसी महीने से शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मानदेय मिलेगा। अभी तक शिक्षामित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को 9 हजार रुपए ही मिल रहे थे। सीएम ने 26 फरवरी को बजट सत्र के दौरान विधानसभा में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की सैलरी बढ़ाने की बात कही थी। शिक्षा मित्रों का 25 जुलाई 2017 को हुआ था समायोजन रद्द
यूपी में 2001 से शिक्षामित्रों की नियुक्ति शुरू हुई थी। सपा की सरकार ने 2013-14 में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया था। जिनका समायोजन नहीं हुआ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने 12 सितंबर, 2015 को इन शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने का आदेश दिया। सपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। 25 जुलाई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया। सहायक अध्यापक से फिर शिक्षामित्र बना दिए गए
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक साथ 1.72 लाख सहायक अध्यापक फिर शिक्षामित्र बना दिए गए। 50 हजार रुपए वेतन पाने वाले फिर 3500 रुपए महीने के मानदेय पर आ गए।इसके खिलाफ प्रदेश भर से आए शिक्षामित्रों ने लखनऊ में गोमती के तट पर बड़ा आंदोलन किया। आंदोलन के बाद सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपए महीने करने की घोषणा की। शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक भर्ती में वरीयता देने के लिए 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती की घोषणा भी की। शिक्षामित्रों को आयु सीमा के साथ 25 बोनस अंक भी दिए गए। उसके बाद 2019 में फिर 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती की घोषणा की। इसमें भी शिक्षामित्रों को आयु सीमा में छूट के साथ बोनस अंक दिए गए। दोनों भर्ती में करीब 13 हजार से अधिक शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बने। भाजपा सरकार ने 2017 में समाधान का किया था वादा
प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में करीब 1.42 लाख शिक्षामित्र हैं। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक छात्र अनुपात 1:30 होना चाहिए। शिक्षामित्रों की संख्या के कारण ही परिषदीय स्कूलों में यह अनुपात 1:22 है। शिक्षा मित्रों की संख्याबल के कारण ही शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि फिलहाल सहायक टीचर भर्ती की आवश्यकता नहीं है। 2017 में दोगुना हुआ था अनुदेशकों का मानदेय, नहीं हुआ लागू
अनुदेशकों का मानदेय वर्ष 2017 में करीब 9 हजार रुपए से बढ़ाकर 17,000 रुपए किया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इस निर्णय को लागू नहीं किया गया। इसके विरोध में अनुदेशकों ने लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच में याचिका दायर की थी। लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के तत्कालीन न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने अनुदेशकों को 17,000 रुपए मानदेय 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केवल एक वर्ष के लिए 17,000 रुपए मानदेय भुगतान का निर्देश दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की वह अपील खारिज कर दी, जिसमें यूपी सरकार अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के खिलाफ थी। साथ ही यह आदेश दिया है कि अनुदेशकों की नौकरी खत्म न की जाए। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने साफ कहा कि संविदा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी। 10 साल से लगातार काम करने की वजह से यह पद ऑटोमैटिक तरीके से सृजित है। अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मानदेय 2017 से लागू किया जाए। सीएम ने वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया सीएम ने वाराणसी के सुबह 10 बजे शिवपुर के परिषदीय स्कूल में ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया। बच्चों को खुद स्कूल बैग पहनाया। गिफ्ट और किताबें दीं। हालचाल पूछा। बाद में बच्चों को खुद खाना परोसा। सीएम ने सपा सरकार पर हमला किया। कहा- 2017 से पहले सरकार के एजेंडे में शिक्षा नहीं थी। उनके लोग नकल कराते थे, ताकि उनके स्कूलों में पढ़ाई न हो। इस तरह की कामचलाऊ व्यवस्था से समाज आगे नहीं बढ़ता। इससे पहले सीएम ने काल भैरव के दर्शन किए। चौखट को हाथ से छूकर प्रणाम किया। फिर मंदिर के अंदर प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं और पुजारियों को हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इसके बाद बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और बाबा का विधिवत षोडशोपचार विधि से पूजन किया। आरती भी उतारी। अब सीएम की बड़ी बातें पढ़िए- 1- ‘पहले बच्चे भैंस, कीचड़ में खेलते मिलते थे’
सीएम ने कहा- पहले तीसरी, चौथी, पांचवीं और छठी के बाद बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। किसी भी सड़क से जाओ तो बच्चे दिनभर घूमते मिलते थे। कोई तालाब में, कोई कीचड़ में, तो कोई भैंसों के साथ खेलता मिलता था। हम बच्चों से पूछते थे कि स्कूल क्यों नहीं जा रहे। पता चलता था कि स्कूल दूर हैं। 2- ‘स्कूली शिक्षा पर 80 हजार करोड़ से अधिक खर्च’
योगी ने कहा- स्कूली शिक्षा पर हम यूपी में 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च करते हैं। इसका रिजल्ट आना चाहिए। जहां कस्तूरबा गांधी स्कूल नहीं थे, वहां इस बजट में हमने पैसा दिया। कस्तूरबा गांधी स्कूलों में 8वीं तक की पढ़ाई थी, जिसके बाद बच्चियां स्कूल जाना बंद कर देती थीं। हमने कहा कि इसे 12वीं तक करेंगे।
3-‘2017 से पहले हमने जर्जर स्कूल भी देखे’
मुझे याद है, जब 2017 में हमारी सरकार बनी थी। हम लोगों ने 1 जुलाई को स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ किया था। उससे पहले मुझे अलग-अलग जिलों में जाने का अवसर मिला था। मैंने बेसिक शिक्षा विभाग के भवनों की जर्जर स्थिति देखी। बंदी की कगार पर पहुंच रहे स्कूलों के बारे में जानकारी ली। मैं एक स्कूल में गया था, जहां प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। 10 से कम बच्चे रह गए हैं। नए सत्र में शायद ये बच्चे भी न आएं। मैंने प्रिंसिपल से पूछा कि आखिर ये बच्चे कहां जा रहे हैं। जवाब मिला-बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है। तब मैंने प्रिंसिपल से कहा था- बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है या आप में पढ़ाने की रुचि नहीं है। बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाना ही हमारा काम है। 4- ‘सामाजिक-आर्थिक समानता लानी है तो सबको शिक्षित करना होगा’
योगी ने कहा- याद रखना, सामाजिक और आर्थिक समानता लानी है तो सबको शिक्षित करना होगा। पहले स्थितियां कैसी थीं? स्कूलों में बच्चों का ड्रॉपआउट रेट 19% से ज्यादा हो गया था। लेकिन अब ड्रॉपआउट रेट 19% से घटकर 3% पर पहुंच गया है। हमें इसे 0% पर लाना है। शिक्षा का मतलब सिर्फ सर्टिफिकेट या डिग्री लेना नहीं होता। शिक्षा इंसान को अच्छे संस्कार देने और सही रास्ता दिखाने का जरिया है। यह जिम्मेदारी ईश्वर ने हमारे गुरुजनों को सौंपी है। अगर शिक्षा इस भूमिका को सही तरीके से निभाए, तो समाज और देश दोनों को अच्छे नतीजे मिलेंगे। 5- ‘1.36 लाख स्कूल सुविधाओं से लैस हुए’
योगी ने कहा-ऑपरेशन कायाकल्प को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया। आज ऑपरेशन कायाकल्प की बात होती है तो भारत सरकार के नीति आयोग ने देश में शिक्षा की सक्सेस स्टोरी के रूप में ऑपरेशन कायाकल्प को जगह दी है। इस ऑपरेशन में 1 लाख 36 हजार से ज्यादा स्कूल सभी सुविधाओं से लैस हुए हैं। ऑपरेशन निपुण से सामान्य शिक्षा के मामले में बच्चों में जिज्ञासा बढ़ी है। हमारे शिक्षकों ने मेहनत की। उसी जर्जर स्कूल में मैं 3 साल बाद गया तो वही प्रिंसिपल थे और 250 से ज्यादा बच्चे थे। प्रिंसिपल का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ था। 6- ‘2017 के पहले 60% से ज्यादा बालिकाएं नंगे पैर चलती थीं’ योगी ने कहा- मुझे याद है, 2017 के पहले 60% से ज्यादा बालिकाएं नंगे पैर चलती थीं। सर्दी हो या गर्मी, बदन पर सिर्फ एक फटी कुर्ती होती थी। कमोबेश बालकों की स्थिति भी ऐसी ही थी। आज मैं कह सकता हूं कि बेसिक शिक्षा में पढ़ने वाले सभी बच्चों को डबल इंजन की सरकार ने साल में 2 ड्रेस, बैग, किताबें, जूते और मोजे सब मुफ्त में दिलाए हैं। जैसे ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी, 15 अप्रैल और 15 जुलाई के बाद दो चरणों में पैसे अभिभावकों के खाते में दिए जाएंगे। 7- ‘मैं आज भी अपने शिक्षकों का पैर छूता हूं’ योगी ने टीचरों से कहा-देश के भविष्य को गढ़ने और उसे तराशने की जिम्मेदारी ईश्वर ने आपको दी है। अगर आप इस दायित्व का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेंगे, तो आपका जीवन भी यशस्वी होगा और ये बच्चे जब आगे बढ़ेंगे, तो आपको याद करते हुए हमेशा सम्मान देंगे। हम लोगों को जिन शिक्षकों ने बचपन में पढ़ाया था, उनसे कभी मिलते हैं तो मैं आज भी उनके पैर छूता हूं। मैं यह नहीं कहता कि मैं संन्यासी हूं, इसलिए पैर नहीं छूऊंगा। वे मेरे गुरुजन थे, मैं आज भी उनका सम्मान करता हूं। मैं यह नहीं मानता कि उन्होंने मुझे केवल बेसिक शिक्षा में पढ़ाया था, उन्होंने मुझे अक्षर ज्ञान कराया और इसलिए मैं आज भी उन्हें सम्मान देता हूं। मैं जब भी जाता हूं, उन्हें बुलवाकर सम्मान करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं और अगर कभी मुलाकात होती है तो पूरा आदर करता हूं। मुझे लगता है कि ऐसे संस्कार आपको अपने बच्चों के अंदर भरने पड़ेंगे। अब हर जनपद में पहले चरण में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालय बनाए गए हैं। इस बार के बजट में भी दो-दो और विद्यालयों के लिए प्रावधान किया गया है, ताकि प्री-प्राइमरी से लेकर 10वीं-12वीं तक एक ही कैंपस में बच्चे अत्याधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकें। ———————- आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…
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Source: Dainik Bhaskar via DNI News
