Breaking News

यूपी कौशल मिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा:एक ट्रेनिंग पार्टनर ने 423 नकली आधार के जरिए लाखों का भुगतान लिया


                 यूपी कौशल मिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा:एक ट्रेनिंग पार्टनर ने 423 नकली आधार के जरिए लाखों का भुगतान लिया

यूपी कौशल मिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा:एक ट्रेनिंग पार्टनर ने 423 नकली आधार के जरिए लाखों का भुगतान लिया

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक ट्रेनिंग पार्टनर ने 423 फर्जी आधार कार्ड बनाकर विभाग से लाखों रुपये की ठगी की है। हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के निदेशक ने यूपीएसडीएम के मिशन निदेशक को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में बताया गया कि एक ट्रेनिंग पार्टनर ने सुनियोजित तरीके से लोगों की फोटो, नाम, जन्मतिथि और पता बदलकर डिजिटल एडिटिंग से नकली आधार कार्ड तैयार कराए। इन फर्जी आधार कार्डों को प्रशिक्षणार्थी (ट्रेनी) बताकर विभाग से भुगतान ले लिया गया। 423 फर्जी आधार कार्ड में 48 पुरुष, अन्य महिलाएं ट्रस्ट के न्यासी हर्षवर्धन अग्रवाल ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया। उन्होंने शिकायत के साथ 423 फर्जी/छेड़छाड़ वाले आधार कार्डों की पूरी सूची (नाम, आधार नंबर, जन्मतिथि, लिंग) भी सौंपी है। प्रशिक्षणार्थियों में 48 पुरुष और अन्य महिलाएं शामिल हैं। हर्षवर्धन अग्रवाल के मुताबिक अपने स्तर से उन्होंने कुछ आधार नंबरों की जांच UIDAI से कराई तो वे फर्जी पाए गए। उन्होंने विभाग से इस मामले की विस्तृत जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत की प्रतियां UIDAI के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय और लखनऊ पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई हैं। UPSDM में 36 रुपए प्रति घंटे से लेकर 375 रुपए प्रतिदिन तक का भुगतान उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण देने वाले NGO या प्राइवेट ट्रेनिंग पार्टनर को प्रति घंटे के हिसाब से भुगतान किया जाता है। यह राशि 36 से 56 रुपए प्रति प्रतिभागी तक होती है। रेजिडेंशियल ट्रेनिंग (जहां रहना-खाना शामिल हो) में प्रति प्रतिभागी 220 से 375 रुपए प्रतिदिन दिए जाते हैं। इसके अलावा यूनिफॉर्म, किताब-कॉपी आदि का भी अलग भुगतान होता है। कौन ले सकता है ट्रेनिंग यह मुफ्त शॉर्ट-टर्म व्यावसायिक ट्रेनिंग है। 14 से 35 साल तक के युवा (5वीं पास से लेकर 12वीं पास) इसमें शामिल हो सकते हैं। कुल 42 सेक्टर में 3714 से ज्यादा कोर्स उपलब्ध हैं। ट्रेनिंग की अवधि 3 महीने से 12 महीने तक हो सकती है। ट्रेनिंग नॉन-रेजिडेंशियल (दिन में आकर) या रेजिडेंशियल (रहकर) दोनों तरह की मिलती है। इसमें थ्योरी, प्रैक्टिकल, कंप्यूटर, अंग्रेजी और कम्युनिकेशन स्किल्स सिखाई जाती हैं। ट्रेनिंग पूरी होने पर 70% युवाओं को नौकरी या स्व-रोजगार दिलाने का लक्ष्य रखा जाता है। ट्रेनिंग में क्या–क्या सिखाते हैं


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

Puri Khabar Yahan Padhein

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *