उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र में छापेमारी करते हुए फर्जी को ट्रैफिक दस्तावेज शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर सर्टिफिकेट के साथ दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 217 विभिन्न फर्जी शिक्षा बोर्ड यूनिवर्सिटी की मार्कशीट सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किया गया है इसके साथ ही कर मोबाइल फोन 42 फर्जी मोहर और 10 मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा उर्फ शनि पुत्र हरिशंकर राय, निवासी ग्राम व पोस्ट सुहौली, थाना बरदह जनपद आजमगढ़ और मनीष कुमार राय पुत्र महेन्द्र राय निवासी ठेकमा, बरदह के रूप में हुई है। फर्जी वेबसाइट बनाकर किया जाता था रिजल्ट अपलोड यूपी एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया की माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in है। जबकि कतिपय अवांछित तत्वों / व्यक्तियों द्वारा फर्जी वेबसाइट www.upmsp-edu.in एवं www.upms ponline.in चलाई जा रही थी। इस बेवसाइट को अधिकारिक बेवसाइट से मिलता जुलता बनाया गया था। जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती थी। इस सम्बन्ध में सचिव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा साइबर थाना, जनपद प्रयागराज में मुअसं 46/2025 पंजीकृत कराया गया था। जिसके क्रम में शुधान्शु शेखर, पुलिस उपाधीक्षक, एसटीएफ लखनऊ के पर्यवेक्षण में ठीम गठित कर अभिसूचना संकलन की कार्यवाही की जा रही थी।
इसी क्रम में STF की टीम अभिसूचना संकलन के क्रम में जनपद आजमगढ़ में भ्रमणशील थी। इस दौरान विश्वनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का सरगना शशि प्रकाश राय है जो अपने घर पर मौजूद है। इस सूचना पर एसटीएफ टीम द्वारा उपरोक्त दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिनसे उपरोक्त बरामदगी हुई। गिरफ्तार अभियुक्त शशि प्रकाश राय ने पूछताछ पर बताया कि वह दिल्ली से B.Sc किया है। इसका एक गिरोह है। जो विभिन्न प्रकार के फर्जी / कूटरचित दस्तावेज तैयार करता है। इसके पहले यह आगरा में भी काम कर चुका है। वर्ष 2022 में जनपद जौनपुर में एक काल सेन्टर खोला, जिसमें सोशल मीडिया के माध्यम उपरोक्त दस्तावेज बनाने आदि का पोस्ट डाला जाता था। जिस पर लोगों द्वारा इनसे सम्पर्क किया जाता था। जिसके बाद शशि प्रकाश द्वारा अपने ममेरे भाई मनीष कुमार राय को आवश्यकता अनुसार डिटेल बताया जाता था। इसके द्वारा बताये हुए डिटेल के अनुसार मनीष राय द्वारा उपरोक्त फर्जी दस्तावेज तैयार किया जाता था। इनके द्वारा बनाई गयी फर्जी बेवसाइट पर कूटरचित मार्कशीट का रिजल्ट भी अपलोड कर दिया जाता था। जिससे लोग बेबसाइट पर रोल नंबर डालकर रिजल्ट ऑनलाइन चेक करते थे, जो वह दस्तावेज (शिक्षा बोर्ड / यूनिर्वसिटी) असली प्रतीत होता था। फर्जी मार्कशीट के आधार पर लोग विभिन्न संस्थानों में नौकरी पा जाते है तो उनका ऑनलाइन / ऑफलाइन वेरीफिकेशन भी कर देता था। फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने के लिए नाम पर होती थी 15 से 20000 की वसूली
फर्जी मार्कशीट व अन्य प्रपत्र आदि बनवाने के लिये 15 से 20 हजार लेता था। जिसे सभी लोग आपस में बांट लेते थे। लोगों को फर्जी दस्तावेज कोरियर के माध्यम से भेजते थे। अब तक लगभग 6-7 हजार से अधिक विभिन्न प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार किया जा चुका है। यूपी एसटीएफ आरोपियों के लिंकेज की भी तलाश कर रही है।

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