मेरठ के सकौती स्थित हितकारी किसान इंटर कॉलेज में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के बाद ‘जाट’ शब्द हटाने को लेकर विवाद गहरा गया है। रविवार को शुरू हुआ यह मामला और तूल पकड़ गया, जब मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रतिमा स्थल से जाति सूचक शब्द हटाने की कार्रवाई आयोजकों द्वारा स्वेच्छा से की गई है। यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट के 16 सितंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में उठाया गया। पुलिस का कहना है कि इस संबंध में वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि महापुरुष पूरे राष्ट्र के प्रेरणास्रोत होते हैं और उन्हें किसी जातीय दायरे में बांधना उचित नहीं है।
वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के पदाधिकारियों ने पुलिस-प्रशासन पर ‘जाट’ शब्द जबरन हटवाने का आरोप लगाया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनू चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रतिमा स्थल पर ‘जाट’ शब्द दोबारा नहीं लगाया गया तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
रविवार को प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान ‘जाट’ शब्द हटाए जाने की जानकारी मिलते ही जाट समाज के लोगों में नाराजगी फैल गई थी। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों ने इसे समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए तत्काल शब्द दोबारा अंकित करने की मांग की। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक चली वार्ता के बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि 15 दिन के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ‘जाट’ शब्द दोबारा लगवाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। पूर्व सांसद हरपाल पंवार ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान की गई राजनीतिक टिप्पणियां उसकी गरिमा के खिलाफ थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिमा से ‘जाट’ शब्द हटाए जाने से समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
वहीं समाज के लोगों का कहना है कि महाराजा सूरजमल की पहचान ‘जाट’ शब्द से जुड़ी हुई है, ऐसे में इसे हटाना उचित नहीं है। अब सभी की नजर प्रशासन के उस आश्वासन पर टिकी है, जिसमें 15 दिनों के भीतर शब्द दोबारा लगाने की बात कही गई है।

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