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मेरठ में अपहरण-हत्या के आरोपियों को आजीवन कारावास:वर्ष 2013 में घर से बुलाकर कर दी थी हत्या, 13 साल बाद मिला न्याय

मेरठ में अपहरण-हत्या के 13 वर्ष पुराने मामले में दो हत्यारोपियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों काफी समय से जमानत पर थे। जैसे ही कोर्ट ने सजा सुनाई, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और जेल में दाखिल करा दिया। पहले एक नजर पूरे मामले पर
सरूरपुर थाना क्षेत्र के करनावल गांव में राजेंद्र परिवार के साथ रहते हैं। फरवरी, 2013 में राजेंद्र के बेटे पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू की हत्या कर दी गई थी। परिवार ने इस मामले में गांव के अमरपाल पुत्र पदम सिंह को नामजद किया जो फरार हो गया था। बाद में पुलिस ने अमरपाल को गिरफ्तार किया, जिसने कुल छह लोगों के हत्या में शामिल होने की पुष्टि की। ठेका दिलाने के बहाने ले गए
पुलिस की मानें तो हत्या वाले दिन अमरपाल गांव में राजेंद्र के घर पहुंचा था। उसने पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू को गन्ना छिलाई का ठेका दिलाने की बात कही और साथ ले गया। इसके बाद पुष्पेंद्र वापस नहीं आया। परिजनों ने अमरपाल से पूछताछ की लेकिन वह टालता रहा। 11 फरवरी, 2013 को पिता राजेंद्र ने सरूरपुर थाने जाकर अमरपाल पर बेटे की हत्या का शक जताते हुए तहरीर दी, जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। अमरपाल की निशानदेही पर शव बरामद
राजेंद्र ने अमरपाल पर हत्या का शक जताया था जो फरार हो गया था। सरूरपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, जिसने पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू की हत्या का राज उगल दिया। उसने बताया कि पुष्पेंद्र को बहाने से श्मशान ले गए और गला दबाकर उसकी हत्या करते हुए शव को दबा दिया। साक्ष्य छिपाने की नीयत से पुष्पेंद्र के कपड़े व सभी अन्य सामान उन्होंने श्मशान में एक तरफ ले जाकर जला दिया। कई और नामों का हुआ था खुलासा
पुलिस पूछताछ में अमरपाल ने यशवीर भड़ाना पुत्र अभयराम, मोहित पुत्र यशवीर भड़ाना, राहुल उर्फ बच्ची पुत्र वीरेंद्र, सोनू पुत्र जीत सिंह और सोहनवीर उर्फ सोनू पुत्र जगवीर के नाम भी उगले जो वारदात में शामिल थे। चार्जशीट में पुलिस ने सभी के नाम खोल दिए। हालांकि कुछ महीने बाद ही आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई। वर्तमान में अभियोजन पक्ष से एडवोकेट वैभव कुमार सिंह और अभियुक्तों की ओर से एडवोकेट सुनील कुमार चिंदौड़ी केस की पैरवी कर रहे थे। एक साल में तीन आरोपियों की मृत्यु
अभियोजन पक्ष के एडवोकेट वैभव कुमार सिंह ने बताया कि चार्जशीट के दौरान मुकदमे में कुल छह नाम शामिल थे। बाद में 4 जनवरी, 2014 को सोनू व राहुल उर्फ बच्ची और 20 मार्च, 2014 को यशवीर की मृत्यु हो गई। मोहित के तारीख पर ना आने के कारण उसकी पत्रावली पृथक कर दी गई। वर्तमान में अमरपाल व सोहनवीर उर्फ सोनू के विरूद्ध मामला ट्रायल पर था। हालांकि दोनों जमानत पर थे। कुल सात गवाह किए गए पेश सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता वैभव कुमार सिंह ने बताया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद केस ट्रायल पर आ गया। वर्तमान में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभिषेक उपाध्याय की कोर्ट संख्या 20 में सुनवाई जारी थी। अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी करते हुए सात गवाह कोर्ट के समक्ष पेश किए। 30 मार्च, 2026 को केस में सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभिषेक उपाध्याय ने फैसला सुनाया, जिसमें दोनों आरोपियों अमरपाल व सोहनवीर उर्फ सोनू को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन करावास व क्रमश: 16 हजार व 13 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुना दी।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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