मेरठ में जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारी हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी, न्यायाधिकरणों और आयोगों के आदेशों के अनुपालन में लापरवाही बरत रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने सख्त चेतावनी पत्र जारी किया है। अधिकारियों पर आरोप है कि वे न्यायालयों के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कई मामलों में सालों तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती और न ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। यहां तक कि न्यायालयों में दाखिल होने वाले प्रति शपथपत्रों में भी लापरवाही बरती जा रही है।
हाल ही में ऐसे दो मामलों में हाईकोर्ट में अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिसके बाद जिलाधिकारी ने यह कदम उठाया है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को भविष्य में ऐसी लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है। जारी चेतावनी पत्र में डॉ. वीके सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सामने आए मामलों में से एक अरबन सीलिंग से संबंधित था, जिसमें हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन के साथ-साथ प्रमुख सचिव आवास को भी तलब किया था। इस पर आनन-फानन में एक एडीएम को प्रयागराज भेजकर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल कराई गई। दूसरा मामला सरधना तहसील से जुड़ा था, जिसमें तहसीलदार को प्रयागराज भेजकर कोर्ट में आवश्यक रिपोर्ट और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। इन घटनाओं ने अधिकारियों की लापरवाही को उजागर किया है।

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