आगरा नगर निगम सदन में हुई पार्षदों की बैठक में अधिकारी नहीं पहुंचे। इससे नाराज पार्षदों ने मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह की मौजूदगी में नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल तथा अन्य अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया। मेयर ने कहा-नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल सहित अन्य अधिकारी सरकार के विरुद्ध काम कर रहे हैं। इस बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। अब विस्तार से पढ़िये
मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने सोमवार को नगर निगम सदन की बैठक बुलाई थी। रविवार शाम तक किसी पार्षद के पास नगर निगम प्रशासन की तरफ से न तो सदन की बैठक की सूचना दी गई और न ही एजेंडा भेजा गया। इधर, मेयर की तरफ से सभी पार्षदों को सोमवार सुबह 11 बजे से सदन की सूचना दे दी गई। इस पर भाजपा और बसपा के लगभग 80 पार्षद पहुंच गए। मगर, नगर निगम का एक भी अधिकारी नहीं पहुंचा। लगभग आधा घंटा इंतजार किया लेकिन एक भी अधिकारी न कर्मचारी सदन में पहुंचा। बाद में बताया गया कि नगर निगम की ओर से सदन की बैठक नहीं है। इसके पीछे तर्क दिया गया-संसद की कार्यवाही चल रही है, ऐसे में नगर निगम का सदन नहीं हो सकता। अधिकारी उस शासनादेश का हवाला दे रहे हैं, जिसमें लोकसभा या विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नगर निगम सदन आयोजित न करने की बात कही गई है।
सोमवार को आगरा में उत्तर प्रदेश विधानमंडल की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति (2025-26) की बैठक प्रस्तावित है। इस उच्चस्तरीय बैठक में जनपद के कई अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है, जिससे नगर निगम की बैठक व्यावहारिक कठिनाइयां बढ़ गई हैं। इससे पार्षदों का पारा हाई हो गया। उनका कहना था कि जब सदन नहीं बुलाया था तो समय पर इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई। पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ खोला मोर्चा
बैठक में अधिकारियों के न पहुंचने पर पार्षदों में रोष दिखाई दिया। भाजपा पार्षदों के साथ-साथ बसपा के पार्षदों ने भी अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया। हालांकि बसपा का एक धड़ा बैठक छोड़कर बीच में से ही चला गया। मगर, बसपा के अधिकांश पार्षद भाजपा के प्रस्ताव के समर्थन में दिखे।
अधिकांश पार्षदों में क्षेत्र में विकास कार्य न होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना था-नगर निगम का सदन न होने से वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को नहीं उठा पा रहे। इसकी वजह से उनका समाधान नहीं हो पा रहा। कई बार दिखा टकराव
भाजपा और बसपा के पार्षदों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी। बसपा के पार्षदों का आरोप था कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद अधिकारी मेयर की नहीं सुन रहे तो ये योगी सरकार की विफलता है। इस पर भाजपा पार्षद भड़क गए। उन्होंने बसपा पार्षदों के खिलाफ रोष व्यक्त किया।
मेयर ने भी बसपा पार्षदों से इस मामले में माफी मांगने को कहा। इस पर गुस्साए कुछ बसपा पार्षद बैठक से चले गए। अब पढ़िये मेयर ने नगर आयुक्त के लिए क्या कहा सदन में पार्षद भी हैं और मैं भी हूं लेकिन यहां एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। मुझे बताते हुए खेद हो रहा है कि आगरा नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार है, जब सदन की बैठक के दौरान नगर निगम का एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। नगर निगम के सभी सदस्यों ने नगर आयुक्त के खिलाफ और बाकी अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया है।
अधिकारियों की हठधर्मिता देख रहे हैं। अधिकारी सरकार के विरुद्ध काम कर रहे हैं। सरकार को इसकी सूचना होनी चाहिए। मैं इसकी शिकायत शासन और सरकार दोनों से करुंगी। फिलहाल मैंने मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव नगर विकास, डीएम को बता दिया है।

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