मुरादाबाद में BJP मेयर विनोद अग्रवाल की बाउंड्री पर बुलडोजर चलने का मामला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुरादाबाद के कलक्टर अनुज सिंह की जांच रिपोर्ट कहती है कि मेयर विनोद अग्रवाल ने ‘CM मॉडल कंपोजिट स्कूल’ के लिए रिजर्व सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बाउंड्री बना रखी थी। जबकि मेयर का दावा है कि उन्होंने 10 साल पहले यह जमीन आजाद समाज पार्टी के नेता हाजी चांद बाबू से खरीदी थी। विवाद के बाद कमिश्नर आन्जनेय सिंह गैरजनपद की टीम से पैमाइश करा रहे हैं। इस बीच इस जमीन तक अप्रोच रोड बनाने के लिए नगर निगम के खजाने के मिसयूज की बात भी सामने आई है।
जंगल में जहां अभी एक भी इंसान नहीं रहता है, वहां मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता अमित चौधरी की जमीन तक अप्रोच रोड बनाने के लिए नगर निगम ने जीभरकर अपना खजाना लुटाया है। जबकि शहर के भीतर आबादी वाले हिस्सों में लोग सड़क, खड़ंजे और नालियों के लिए तरस रहे हैं। भाजपा नेताओं को जिताने वाला लाइनपार इलाका मामूली बारिश में तालाब की शक्ल अख्तियार कर लेता है, लेकिन नगर निगम का खजाना आबादी से दूर जंगल में मेयर और भाजपा नेताओं की निजी जमीन तक अप्रोच रोड बनाने के लिए लुटाया जा रहा है।
JE ने झूठी रिपोर्ट में कहा-जलभराव से स्थानीय निवासियों को दिक्कत होती है
नेशनल हाईवे बाईपास पर पुराने टोल प्लाजा के पास हाईवे किनारे जहां मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता अमित चौधरी की जमीन जंगल में है। इसके आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं है। जमीन के चारों और सरकारी लैंड है। आगे गांगन नदी का रकबा है। लेकिन मेयर और भाजपा नेता की जमीन की वैल्यू बढ़ाने और इन तक अप्रोच रोड बनाने के लिए नगर निगम अधिकारियों ने झूठ बोलकर यहां सड़क बनाई। 20 मई 2022 को दी अपनी रिपोर्ट में नगर निगम के अवर अभियंता ने लिखा- स्थलीय निरीक्षण करने पर पाया गया कि मौके पर कच्ची सड़क है। जिसकी वजह से जलभराव हो रहा है। इसके कारण क्षेत्रवाासियों को आवागमन में असुविधा हो रही है। इसलिए इस सड़क का निर्माण जनहित में आवश्यक है।
दस्तावेज बताते हैं, खुद मेयर ने दी सड़क को मंजूरी
नगर निगम के एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज बताते हैं कि, जंगल में अपनी जमीन तक सड़क बनाने के लिए प्रोजेक्ट को खुद मेयर विनोद अग्रवाल ने मंजूरी दी थी। इस सड़क का निर्माण 15वें वित्त आयोग की निधि से किया गया। जिसके अध्यक्ष खुद मेयर हैं। महापौर विनोद अग्रवाल की अध्यक्षता में 27 मई 2022 को नगर निगम द्वारा 15वां वित्त आयोग निधि के लिए एक बैठक हुई। इसमें बुनियादी ग्रांट की दूसरी किश्त के प्रस्तावित कार्यों का अनुमोदन किया गया। इसमें सीरियल नंबर 12 पर मेयर की जमीन तक बनने वाली सड़क भी है। कार्य के उल्लेख में लिखा गया- पुराने टोल प्लाजा के पास नेशनल हाईवे बाईपास से अमित चौधरी की फैक्ट्री तक हॉटमिक्स द्वारा सड़क का सुधार कार्य। बता दें कि नगर निगम के खजाने से बनी इस सड़क के एक ओर भाजपा मेयर अग्रवाल ने करीब 10 बीघा जमीन पर और दूसरी ओर भाजपा नेता अमित चौधरी ने करीब 22 बीघा जमीन पर बाउंड्री रखी थी। दस्तावेजों में कोई चकमार्ग तक नहीं, निगम ने कच्ची सड़क का झूठ बोला
सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि जिस जमीन पर नगर निगम ने सड़क डाली वहां कोई चकमार्ग तक नहीं था। रिकॉर्ड में यह पूरा सरकारी जमीन का पैच है। जिसके बीच में नगर निगम ने सड़क डाल दी। अब यहां स्कूल प्रस्तावित है और बीच की सड़क को डिमोलिश करके पूरे लैंड पैच को एक ही बाउंड्री में लिया जाएगा। मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता अमित चौधरी को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने झूठ पर झूठ बोला।
मेयर बोले- मुझे नहीं पता, नगर आयुक्त खामोश
मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने यह सड़क नहीं डलवाई है। मेयर का कहना है कि उन्हें तो ये मालूम था कि सड़क संभवत: जिला पंचायत से डलवाई गई है। मेयर ने कहा कि उन्हें इस सड़क के निर्माण के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि दस्तावेज बताते हैं कि खुद मेयर ने ही इस सड़क के निर्माण को अपने हस्ताक्षर से मंजूरी दी है।
वहीं इस मामले में सरकारी धन के खुले दुरुपयोग को लेकर जब नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल से सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली और कोई जवाब नहीं दिया है।
मेयर ने कहा था-प्रशासन मेरी छवि खराब कर रहा मुरादाबाद में अपनी बाउंड्री पर प्रशासन का बुलडोजर चलने के बाद महापौर विनोद अग्रवाल ने आहत मन से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को खत लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है- मैं बीते 40 सालों से संघ और भारतीय जनता पार्टी का एक समर्पित कार्यकर्ता रहा हूं। जिस तरह की कार्रवाई मेरे पर की गई है, उसको लेकर आगामी विधानसभा चुनावों में हम किस तरह से कार्यकर्ताओं के बीच जाएंगे और उनका मनोबल बढ़ाएंगे। मैं आपको ये खत इस आशा और विश्वास के साथ लिख रहा हूं कि आप भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के मान सम्मान की रक्षा के लिए जो भी उचित हो वो कार्यवाही सुनिश्चित कराएं। बता दें कि 12 मार्च को मुरादाबाद सदर तहसील प्रशासन ने नेशनल हाईवे बाईपास के किनारे करीब 20 बीघा सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया था। प्रशासन का कहना था कि भूमि सरकारी है और यहां ‘CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ बनाया जाना है। लेकिन मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता ऋषिपाल चौधरी के छोटे भाई अमित चौधरी ने इस जमीन की बाउंड्री करा रखी थी। जिसे 12 मार्च को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया था। मेयर का दावा है कि यह जमीन सरकारी नहीं बल्कि उनकी है, जिसे उन्होंने 2017 में आजाद समाज पार्टी के नेता हाजी चांद बाबू से खरीदा था। मुरादाबाद के अफसरों पर यकीन नहीं, दूसरे जिले से कराएं पैमाइश मेयर ने अपर मुख्य सचिव को भी इस मामले में एक शिकायती पत्र भेजा था। जिसमें उन्होंने कहा था- आईएएस राममोहन मीणा का कृत्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ओर से अवैध बुलडोजर कार्रवाई के संबंध में दिए गए आज्ञापक दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश उत्तर प्रदेश शासन ने अनुपालन के लिए सभी जिलाधिकारियों को प्रेषित किया है। अतिक्रमण हटाने के लिए न्यूनतम 15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है। इस नोटिस की प्रति जिलाधिकारी की ओर से इस कार्य के लिए बनाई गई ई-मेल आईडी पर भेजने के भी निर्देश हैं। ACS संजय प्रसाद को भेजे खत में मेयर विनोद अग्रवाल आगे लिखते हैं- श्रीमान जी मेरी भूमि की पैमाइश किसी अन्य जिले के उपजिलाधिकारी द्वारा कराई जाए ताकि जांच निष्पक्ष एवं सही हो सके। मुझे मुरादाबाद सदर के एसडीएम व लेखपाल के कार्यों पर संदेह है और इनसे उचित न्याय की अपेक्षा नहीं है। कृपया विषय की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्यवाही करने की कृपा करें। इनके द्वारा महानगर के निर्वाचित प्रथम नागरिक महापौर की छवि को धूमिल करने की नियत से ये गलत कृत्य किया गया है। आगे भी गलत करने का प्रयास कर रहे हैं।
मेयर यहां नगर निगम से म्यूजिकल पार्क बनवाना चाहते थे नगर निगम के सोर्सेज का कहना है कि, जहां मेयर की बाउंड्री वाल पर बुलडोजर चला है, वहां मेयर की योजना नगर निगम से म्यूजिकल पार्क बनवाने की थी। मेयर विनोद अग्रवाल ने भी इसकी पुष्टि की है। दरअसल पिछले कुछ समय में सत्ताधारी दल के नेताओं पर ये आरोप लगे हैं कि वे विकास की योजनाओं को अपनी जमीनों के आसपास ले जाकर अपनी जमीनों के रेट बढ़ाने की कवायद में जुटे हैं। इसके अलावा योजनाओं के आसपास की जमीनें खरीदकर उन्हें योजना के लिए अधिग्रहीत कराने का खेल भी बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है।

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