बांका सांसद गिरधारी यादव ने मृत्युभोज को सामाजिक और आर्थिक अभिशाप बताया है। उन्होंने इस कुप्रथा के बहिष्कार का आह्वान किया। इसी क्रम में बांका के बेलहर प्रखंड के पथकुड़िया गांव में एक परिवार ने सांसद की प्रेरणा से अपने पिता के निधन के बाद मृत्युभोज न करने का संकल्प लिया। मृत्युभोज शोक संतप्त परिवारों पर आर्थिक बोझ सांसद यादव ने क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान कहा कि मृत्युभोज शोक संतप्त परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालता है। कई बार परिवार कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि किसी परिजन की मृत्यु के समय परिवार पहले से ही गहरे दुख और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा होता है। ऐसे में मृत्युभोज का आयोजन उनकी पीड़ा को और बढ़ा देता है। यह प्रथा कुछ संपन्न लोगों द्वारा सामाजिक दिखावे के लिए निभाई जाती है, जबकि गरीब परिवारों के लिए यह किसी विपदा से कम नहीं होती। सांसद ने स्पष्ट किया कि इस कुप्रथा पर रोक लगनी चाहिए और समाज को स्वयं आगे आकर इसे खत्म करने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि देश के कुछ राज्यों में मृत्युभोज पर कानूनी प्रतिबंध भी लगाया गया है, लेकिन केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक बहिष्कार से ही इसका अंत संभव है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे आगे आकर इस प्रथा के खिलाफ पहल करें और समाज को नई दिशा दें। इसी प्रेरणा से पथकुड़िया गांव में स्वर्गीय नुनेश्वर यादव के पुत्र विजय यादव ने अपने पिता की मृत्यु के उपरांत मृत्युभोज नहीं करने का साहसिक निर्णय लिया, जिसकी स्थानीय लोगों ने सराहना की। समाज एकजुट होकर मृत्युभोज का बहिष्कार करे जिले के लोगों का मानना है कि यदि समाज एकजुट होकर मृत्युभोज का बहिष्कार करे, तो न केवल गरीब परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रभावी रोक लगेगी। इस अवसर पर नरेश यादव, मुकेश यादव, कुंदन कुमार, राजेंद्र यादव, सांसद प्रतिनिधि कौशल किशोर सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
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