मुरादाबाद मंडल में गली-गली कुकरमुत्तों की तरह उग आए झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक मरीजों को मौत बांटने में लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिन अफसरों पर इनके खिलाफ कार्रवाई करने का जिम्मा है, उन पर वसूली के आरोप लग रहे हैं। कार्रवाई के दावों और आरोपों के बीच ये झोलाछाप क्लीनिक धड़ल्ले से खुलेआम चल रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो औसतन हर रोज एक जिंदगी इन झोलाछापों की अवैध दुकानों पर दम तोड़ रही है। इस मामले में हमने मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आन्जनेय सिंह से बात की। देखिए इस मुद्दे पर कमिश्नर का पूरा इंटरव्यू… (VIDEO देखें) रेता ढोने वाला आरिफ बन बैठा डॉक्टर
हालात ये हैं कि कहीं 5वीं फेल डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहा है तो कहीं वर्षों तक रेता ढोने वाले ने दवाखाना खोलकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ शुरू कर दिया। संभल में तो ऐसे ही रेता ढोने वाले एक झोलाछाप ने अपनी पत्नी को भी इसी धंधे में उतार लिया। बगैर किसी डिग्री डिप्लोमा के न सिर्फ मरीजों को दवाएं दे रहे हैं बल्कि ये दंपती तो सिजेरियन डिलीवरी तक के दावे करता है। हम बात कर रहे हैं संभल के असमोली थाना क्षेत्र में मंढ्न में स्थित मोहम्मद आरिफ और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन के दवाखाने की। धंधा चल निकला तो आरिफ ने पत्नी के बाद भतीजे नवाज शरीफ को भी इसी में जोड़ लिया। मोहम्मद आरिफ असमोली के ही मीरपुर का रहने वाला है। इसी झोलाछाप क्लीनिक से पूरी फैमिली तरक्की कर रही है। आरिफ का भाई लियाकत गांव का प्रधान बन गया है। बच्चे की जान ली, FIR हुई, चंद मिनटों में छूटा
संभल के खाबरी भोला गांव के रहने वाले सोनू पुत्र अतर सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा- मैंने अपनी पत्नी चांदनी (23 साल) को डिलीवरी के लिए हमने 28 जनवरी को उसे मढ़न में झोलाछाप डॉक्टर आरिफ के मढ़न स्थित क्लीनिक पर एडमिट कराया था। आरिफ की पत्नी शाइस्ता ने डिलीवरी कराई थी। लेकिन डिलीवरी सही से नहीं होने की वजह से नवजात की जान चली गई। हमने असमोली थाने में शाइस्ता परवीन और उसके भतीजे नवाज शरीफ के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। पुलिस ने नवाज शरीफ को पकड़ भी लिया था लेकिन बाद में छोड़ दिया गया।
मुरादाबाद के करुला में हर दूसरे घर में झोलाछाप क्लीनिक मुरादाबाद के करुला में हर दूसरे घर में झोलाछाप दवाखाने चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग यहां कार्रवाई के दावे तो करता है लेकिन झोलाछापों की इन दुकानों को कभी बंद नहीं करा सका है। आए दिन यहां मरीजों की मौत के बाद हंगामा होता है। पुलिस के लिए भी झोलाछापों की ये दुकानें सिरदर्द बन रही हैं। लेकिन कभी भी स्वास्थ्य महकमा इन झोलाछापों पर प्रभावी एक्शन नहीं लेता। इसे लेकर तमाम सवाल उठते रहे हैं।

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