सिटी रिपोर्टर | मोतिहारी मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत स्टार्टअप शुरू करने के लिए जिले के 1200 लोगों ने तकरीबन 60 करोड़ की राशि बतौर लोन पर ली थी। इस राशि को स्टार्टअप शुरू करने के एक साल बाद से 84 किस्तों में वापस करने की शर्त थी, लेकिन किसी ने एक पैसा भी सरकार को वापस नहीं किया। सभी 1200 लोगों ने सरकार की करीब 60 करोड़ की राशि को डकार गए। अब जिला उद्योग केंद्र इन लोगों से पैसों की वसूली करने की तैयारी की जा रही है। जिला उद्योग केंद्र पैसा नहीं लौटाने वाले उद्यमियों को चिह्नित कर नोटिस भेजने की कार्रवाई शुरू की गई है। नोटिस के 30 दिनों के अंदर यदि पैसा जमा नहीं करने पर सर्टिफिकेट केस दर्ज की जाएगी। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शुभम कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से जिले के करीब 1200 लोगों को नया स्टार्टअप शुरू करने के लिए औसतन 5 लाख रुपए दिए गए थे। इसे 84 िकस्तों में वापस करने की शर्त थी, लेकिन किसी ने अबतक लौटाना शुरू तक नहीं किया है। अब उन सभी को चिह्नित कर नोटिस भेजी जा रही है। 30 दिनों में पैसा जमा नहीं करने वाले पर सर्टिफिकेट केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। क्या है मु़ख्यमंत्री उद्यमी योजना मुख्यमंत्री उद्यमी योजना बिहार सरकार की एक विशेष योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने में मदद करना है। इस योजना के तहत कुल परियोजना लागत का 50% अनुदान और 50% ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है। इसका लक्ष्य स्वरोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। हरसिद्धि की किशोरी कुमारी ने योजना के तहत 5 लाख रुपए लेकर मशाला बनाने का कारोबार शुरू किया। कुछ दिनों तक मशाला उत्पादन कर बाजार मंे बेचने का काम भी शुरू किया। लेकिन वर्तमान में यह इकाई बंद हो गई है। संग्रामपुर के रामबाबू प्रसाद ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से लोन लेकर पापड़ बनाने का कारोबार शुरू किए थे। लेकिन दो साल बाद ही उत्पादन बंद हो गया। सरकार को पैसा भी वापस नहीं किए।
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