बहुचर्चित माफिया मुख्तार अंसारी को विचरण न्यायालय से पहली सजा दिलाने वाले सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) नीरज कुमार श्रीवास्तव 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर कल सेवानिवृत्त होंगे। वर्ष 2002 में तत्कालीन जिलाधिकारी आर्यका अखौरी द्वारा 15 दिनों के लिए नियुक्त किए गए श्रीवास्तव को जनवरी 2003 में राज्य सरकार ने अस्थायी आबद्धता प्रदान की थी। लगभग 18 सालों के अपने कार्यकाल (2002-2012 व 2017-मार्च 2026) में उन्होंने 3000 से अधिक आपराधिक मुकदमों का संचालन करते हुए सौ से ज्यादा अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई। नीरज श्रीवास्तव उस समय सुर्खियों में आए जब उच्च न्यायालय के निर्देश पर जनप्रतिनिधियों के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए एमपी-एमएलए कोर्ट का गठन हुआ। गाजीपुर में पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह से जुड़े मामलों की सुनवाई शुरू हुई। तत्कालीन जिलाधिकारी आर.के. अग्रवाल ने राज्य की ओर से पैरवी के लिए नीरज कुमार श्रीवास्तव का चयन किया। हालांकि बृजेश सिंह से जुड़े मामले बाद में लखनऊ स्थानांतरित हो गए, लेकिन अन्य मामलों में उन्होंने प्रभावी पैरवी जारी रखी। वर्ष 2007 में दर्ज गैंगस्टर मुकदमे में, जो अवधेश राय हत्याकांड और नंदकिशोर रूंगटा अपहरण-हत्या प्रकरण पर आधारित था, अदालत ने मुख्तार अंसारी को 10 वर्ष और सहआरोपी भीम सिंह को 5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा करंडा थाने के एक अन्य गैंगस्टर मामले में भी मुख्तार अंसारी को 10 वर्ष की सजा मिली। वहीं 2005 में विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड से जुड़े मामले में 2007 में मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल अंसारी को भी एमपी-एमएलए कोर्ट गाजीपुर ने दोषी ठहराया, जिसके चलते अफजाल अंसारी की संसद सदस्यता भी समाप्त हो गई। अपने कार्यकाल के दौरान श्रीवास्तव ने 2018-19 में एक नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को आजीवन कारावास दिलाना अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अभियोजन कार्यालय के तत्कालीन संयुक्त निदेशक दिलीप कुमार श्रीवास्तव, वर्तमान संयुक्त निदेशक आनंद पांडे, सहकर्मी देवेंद्र सिंह, तत्कालीन जिलाधिकारी आर.के. अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को दिया, जिन्होंने निर्भीकता से कार्य करने में सहयोग किया। उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 2023 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मानित भी किया गया।

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