‘निर्बल इंडियन शोषित हमारा आमदल’ यानी निषाद पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 का आगाज रविवार को गोरखपुर रैली से कर दिया। आज, 23 मार्च को प्रयागराज में रैली करेंगे। गोरखपुर में पार्टी अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने आक्रामक तेवर दिखाए…समाज के लिए भावुक भी हुए। आरक्षण का मुद्दा उठाकर निषाद समाज को एकजुट करने की कोशिश की। साथ ही निषाद समाज को एकजुट और आक्रामक राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करने की अपनी रणनीति भी साफ कर दी है। यूपी में फिलहाल उनके निशाने पर 160 सीटें हैं, जहां निषाद समाज प्रभावी भूमिका में है। राजनीति के जानकार इस रैली को कैसे देखते हैं, पढ़िए… पहले यूपी में निषाद वोटर की ताकत जानिए अब गोरखपुर रैली में संजय निषाद की रणनीति और मायने जानिए संजय निषाद ने खेला भावनात्मक जुड़ाव का दांव गोरखपुर रैली के दौरान डॉ. संजय निषाद ने निषाद समाज के साथ हुए ‘अन्याय’ का जिक्र करते हुए अचानक भावुक होकर आंसू बहाए। उनकी इस प्रतिक्रिया से सभा में मौजूद लोगों में भावनात्मक उबाल देखने को मिला। नारेबाजी तेज हो गई और माहौल पूरी तरह उनके पक्ष में जाता दिखा। उन्होंने कहा कि वे अपने समाज के लिए ‘फांसी पर चढ़ने को भी तैयार’ हैं। संजय निषाद ने आरक्षण का मुद्दा उठाकर समाज को जोड़ने की कोशिश की। रैली में संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का हक सवर्णों ने नहीं, बल्कि सपा, बसपा और कांग्रेस ने छीना है। उन्होंने बिना नाम लिए ऐसे नेताओं को निशाने पर लिया, जो निषाद समाज के नाम पर राजनीति करते हैं, और कार्यकर्ताओं से अपील की कि बिना पार्टी की अनुमति ऐसे लोगों को गांव में न घुसने दें। राजनीति के जानकारों का कहना है कि संजय निषाद ने भावनात्मक जुड़ाव का दांव खेला है। वरिष्ठ पत्रकार कुमार हर्ष बताते हैं कि डॉ. संजय निषाद इस रैली के माध्यम से अपने समाज को राजनीतिक रूप से मुखर जातियों की श्रेणी में खड़ा कर रहे हैं। राजनीतिक रूप से जागरूक करने का श्रेय उन्हें पहले से ही मिल चुका है। अब ‘हाथ में मोटा डंडा और उसमें निषाद राज का झंडा’ के जरिए वह निषाद समाज को आक्रामक राजनीतिक शक्ति के रूप में खड़ा होने का आह्वान करते नजर आ रहे हैं। कुमार हर्ष का कहना है कि एक चीज में कोई शक नहीं है कि डॉ. संजय ने किसी भी पार्टी से पहले 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी सिलसिलेवार ढंग से शुरू कर दी है। बारगेनिंग की जमीन तैयार कर रहे
यह महारैली सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव के लिए बारगेनिंग टूल के रूप में भी देखी जा रही है। डॉ. संजय निषाद पहले ही कह चुके हैं कि यदि उन्हें भाजपा की हारी हुई सीटें दी जाएं, तो वे जीत दिला सकते हैं। उनकी नजर उन करीब 160 सीटों पर है, जहां निषाद समाज प्रभावी है। 2022 में पार्टी को 15 सीटें मिली थीं, जिनमें 9 पर जीत दर्ज हुई। अब पार्टी घटक दलों में ज्यादा सीटों की मांग के साथ अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। वरिष्ठ पत्रकार कुमार हर्ष का कहना है कि संजय निषाद ने समाज के लिए एससी के आरक्षण का मुद्दा इसलिए उठाया गया है ताकि समाज का यदि कोई भाग अब भी अलग हो तो वह इनसे जुड़ जाए। इसका साफ संदेश है कि निषाद समाज अब राजनीतिक रूप से अनुगामी नहीं रहा बल्कि मुखर हो चुका है। ये पॉवर और प्रेशर पॉलिटिक्स है दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अमित उपाध्याय कहते हैं कि इसे पॉवर और प्रेशर पॉलिटिक्स कह सकते हैं। इस रैली में एससी आरक्षण का मुद्दा उठाकर वह खुद को सर्वमान्य नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। एससी आरक्षण के मामले में पूरा समाज एकजुट हुआ तो इनके सामने कोई नेता नहीं रहेगा। इसका फायदा सीट शेयरिंग में मिलेगा। फिर चाहे वो मंत्रिमंडल विस्तार में हो या विधानसभा चुनाव। आज प्रयागराज में निषाद पार्टी की रैली ——————— ये खबर भी पढ़ें… मंत्री निषाद मंच पर फूट-फूट कर रोए:बोले- हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा; गोरखपुर में 3000 बाइक के साथ रैली निकाली गोरखपुर में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद मंच पर फूट-फूट कर रोए। उन्होंने कहा, हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है। हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। हमें मजबूत होना होगा। आप सभी से इतना कहूंगा कि अपनी निषाद पार्टी के लिए खड़े हो जाओ। अपनी पार्टी को मजबूत करो। इससे पहले संजय निषाद ने रविवार को 2027 विधानसभा चुनाव का शंखनाद किया। पढ़ें पूरी खबर

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