प्रयागराज के सोरांव में आठ साल की मासूम से रेप के बाद हत्या के मामले में पॉक्सो अदालत ने दोषी मुकेश पटेल को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य है और समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है, इसलिए आरोपी को मृत्युदंड दिया जाना उचित है। फैसले में स्पष्ट किया गया कि मृत्युदंड का अर्थ है फांसी पर लटकाकर मृत्यु देना। 18 महीने के भीतर फैसला
इस मामले में अदालत ने त्वरित सुनवाई करते हुए घटना के करीब 18 महीने के भीतर फैसला सुनाया। साथ ही पीड़िता के परिजनों को जिला विधि सेवा प्राधिकरण, प्रयागराज के माध्यम से तत्काल राहत के रूप में दो लाख रुपये तक का मुआवजा देने के निर्देश दिए। यह राशि आरोपी पर लगाए गए जुर्माने से अलग होगी।अदालत ने विशेष लोक अभियोजक विनय त्रिपाठी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों के साथ उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद यह फैसला सुनाया।
क्या था पूरा मामला
विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, घटना 3 अक्तूबर 2024 की शाम करीब 6:30 बजे की है। आठ वर्षीय बच्ची शिवगढ़ चौराहे के पास लगे दुर्गा पूजा पंडाल में गई थी, लेकिन घर लौटते समय लापता हो गई। अगले दिन 4 अक्तूबर को उसका शव गांव के एक धान के खेत में मिला। शव पर गंभीर चोटों के निशान थे। हाथ-पैर और दांत टूटे हुए थे, मुंह से खून और झाग निकल रहा था तथा निजी अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे। पीड़िता की मां की तहरीर पर अज्ञात में मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में आरोपी के तौर पर मुकेश पटेल का नाम प्रकाश में आया। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया गया। दिसंबर 2024 में लगी चार्जशीट
जांच के बाद 10 दिसंबर 2024 को आरोप-पत्र दाखिल किया गया, जबकि 21 दिसंबर 2024 को अदालत ने आरोप तय किए। साक्ष्य परीक्षण पूरा होने के बाद 26 मार्च 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया गया और 30 मार्च 2026 को सजा सुनाई गई। अदालत ने आरोपी को बीएनएस की धारा 103(1) व 65(2), पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 5(एम)/6 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दोषी ठहराया।
12 दिन बाद एनकाउंटर में लगी थी गोली
सीसीटीवी फुटेज से पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया था। फुटेज में आरोपी मुकेश घटना वाली शाम बच्ची को साइकिल पर बैठाकर ले जाता दिखाई दिया था। पुलिस का दावा था कि आरोपी ने पहले मासूम से दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर ताबड़तोड़ वार किए। उसके दांत तोड़ दिए, चेहरे पर चोट पहुंचाई और दोनों हाथ भी तोड़ दिए। 16 अक्टूबर को पुलिस ने मुठभेड़ में आरोपी को गिरफ्तार किया। उसने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली भी लगी थी। 49 वर्षों में फांसी की 10वीं सजा
प्रयागराज के जिला एवं सत्र न्यायालय में बीते 49 वर्षों में यह फांसी की दसवीं सजा है। इनमें दो मामले ऐसे भी रहे हैं, जिनमें क्रमशः 6-6 लोगों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। सबसे अधिक फांसी की सजाएं वर्ष 2009 में सुनाई गई थीं। मार्च 2009 में बहरिया थाना क्षेत्र के करनापुर गांव में तीन वर्ष की बच्ची की गला घोटकर हत्या करने के दोषी अभियुक्त पाली और राम समुझ को फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, यह मामला हाईकोर्ट से पुनर्विचार के लिए वापस भेजा गया था। बाद में नए सिरे से विचारण के पश्चात दिसंबर 2009 में पुनः दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद कोरांव थाना क्षेत्र के चर्चित देवसदन हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश डी.पी.एन. सिंह ने दो अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि चार अन्य अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। इसी क्रम में संजय को भी वर्ष 2009 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। वहीं, उतरांव के कल्लू हत्याकांड में भी दोषियों को मृत्युदंड दिया गया था। 2009 में सबसे ज्यादा चार केस में फांसी की सजा हुई थी। इन मामलों में अपर सत्र न्यायाधीश श्यामलाल ने शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहिर को सुनकर फैसला सुनाया था।

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