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मालिनी के मोहक सुर पर मोहित हुए श्रोता, VIDEO:संकटमोचन संगीत समारोह में चैती,ठुमरी,दादरा और सोसर से की हनुमत वंदना
संकट मोचन संगीत समारोह का 103वां वर्ष अपने आप में परंपरा, भक्ति और शास्त्रीय संगीत की अद्भुत विरासत का जीवंत उत्सव है। यह मंच केवल प्रस्तुति का अवसर नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए मान्यता का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि जो कलाकार यहाँ प्रस्तुत हो जाता है, उसकी साधना पर मानो हनुमान जी की स्वीकृति की मुहर लग जाती है। मंदिर प्रांगण भले ही आकार में बहुत बड़ा न हो, लेकिन यहाँ की ऊर्जा और उत्साह इसे विराट बना देते हैं। हज़ारों श्रोता मंच के सामने, गलियारों में, और यहाँ तक कि छतों पर बैठकर संगीत का आनंद लेते हैं। यहाँ के श्रोता भी संगीत के गहरे जानकार होते हैं वे केवल सुनते नहीं, बल्कि ताली और ‘खाली’ के माध्यम से ताल में अपनी सहभागिता भी दर्ज कराते हैं। सीधी हथेली की ताली ‘भरी’ का संकेत देती है, जबकि उल्टी हथेली की ‘खाली’ ताल के सूक्ष्म विभाजन को दर्शाती है। अब जानिए मालिनी अवस्थी ने क्या प्रस्तुति दी इस वर्ष के समारोह में मालिनी अवस्थी ने अपनी गायकी से समां बाँध दिया। उन्होंने राग विहाग में ‘लंका जो धाय गयो’ से प्रस्तुति की शुरुआत की, जिसके बाद ‘नदिया तू धीरे बहो रे…’, ‘आओ पिया सूनी पड़ी है सेजिया हमार’ और ‘सूतल सइयां के जगावे हो रामा तोरी मीठी बोलिया’ जैसे गीतों से वातावरण को भावविभोर कर दिया। इसके आगे उन्होंने ‘रघुवर पहिरैं फुलन तोर सजना, राम जी पहिरैं…’, ‘बरस रही बुनिया…’ और ‘गंगा रेती पे बंगला छवाय दा मोरे राजा…’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को लोक और शास्त्रीय संगीत के अद्भुत संगम का अनुभव कराया। उनकी प्रस्तुति में संगतकारों की भूमिका भी उल्लेखनीय रहीहारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर शुभ महाराज ने सधी हुई संगत से कार्यक्रम को और ऊँचाई दी। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें…
Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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