महोबा में रमजान के आखिरी शुक्रवार, अलविदा जुमा की नमाज अकीदत और शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गई। शहर की अब्बा हुजूर, गढ़ी दरवाजा मस्जिद सहित जिले भर की मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे। इस दौरान मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी गईं। पुलिस प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नमाज संपन्न हुई। रमजान के पवित्र महीने के अंतिम जुमे को अलविदा जुमा के रूप में मनाया गया। महोबा जनपद में इबादत और अकीदत का माहौल देखने को मिला। अब्बा हुजूर दरगाह स्थित मस्जिद, भटीपुरा, मकनियापुरा, काजीपुरा, भीतरकोट और सुभाष चौक जैसी प्रमुख मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी। नमाज से पूर्व मस्जिदों के पेश इमामों ने खुतबा पढ़ा और इस पाक महीने को विदाई दी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पुलिस अधीक्षक प्रबल प्रताप सिंह के निर्देश पर जिले की सभी मस्जिदों और प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाए गए, जिससे नमाज शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सकी। नमाज के बाद मस्जिदों में देश की तरक्की, आपसी भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। इस दौरान मानवीय संवेदनाओं का भी प्रदर्शन हुआ। नमाजियों ने ईरान में हुए हमले में जान गंवाने वाली मासूम बच्चियों की मगफिरत (मोक्ष) के लिए भी खुदा से प्रार्थना की। अब्बा हुजूर मस्जिद में नमाज के उपरांत बदर हाशमी ने इस्लाम के मूल सिद्धांतों को समझाया। उन्होंने कहा कि इस्लाम हमें सिखाता है कि यदि आपका पड़ोसी भूखा है, तो आपका त्योहार अधूरा है। हाशमी ने जोर देकर कहा कि सबसे पहले पड़ोसी की भूख मिटाना ही सच्ची इबादत है। अलविदा जुमा की नमाज पूरी होने के साथ ही पूरे जिले में ईद की रौनक बढ़ गई है। शनिवार को मनाए जाने वाले ईद-उल-फितर के त्योहार को लेकर बाजारों में खासी चहल-पहल देखी जा रही है। लोग नए कपड़े, सेवइयां और इत्र जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी में व्यस्त हैं। एक महीने के कठिन रोजों के बाद अब हर कोई ईद की खुशियां बांटने को उत्सुक है।

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