भोजपुर जिले के पीरो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शुक्रवार को एक महिला ने गैस्ट्रोस्किसिस नामक दुर्लभ जन्मजात विकार से ग्रसित शिशु को जन्म दिया। बम्हवार गांव निवासी दीपू कुमार की पत्नी प्रीति कुमारी ने इस बच्चे को जन्म दिया। गैस्ट्रोस्किसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शिशु के पेट की दीवार पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती, जिससे आंतें शरीर के बाहर दिखाई देती हैं। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रवि कुमार ने बताया कि यह विकार हजारों बच्चों में से किसी एक में पाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर पहचान और विशेषज्ञ सर्जिकल उपचार से अधिकांश शिशुओं को बचाया जा सकता है। जन्म के तुरंत बाद नवजात को विशेष देखभाल, संक्रमण से सुरक्षा और शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की आवश्यकता होती है। शिशु का प्रसव डॉ. सुनील तिवारी की देखरेख में जीएनएम रीमा कुमारी और एएनएम सुनीता कुमारी ने सफलतापूर्वक कराया। चिकित्सकों ने तत्परता दिखाते हुए नवजात को प्राथमिक उपचार दिया। जन्म के बाद मां और शिशु दोनों की स्थिति स्थिर बनी हुई है। पीरो सीएचसी में प्रारंभिक देखभाल के बाद, नवजात को उन्नत सर्जिकल सुविधा के लिए आरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है। डॉक्टरों का अनुमान है कि समय पर ऑपरेशन और विशेषज्ञ निगरानी से 10 से 12 सप्ताह के भीतर बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार, गैस्ट्रोस्किसिस के सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि, यह गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में भ्रूण के विकास में गड़बड़ी के कारण होता है। नियमित प्रसव पूर्व जांच (एएनसी), अल्ट्रासाउंड और संतुलित पोषण से कई जन्मजात विकारों की समय पर पहचान संभव है। पीरो सीएचसी की टीम ने तत्परता और विशेषज्ञता के साथ इस दुर्लभ प्रसव को सफलतापूर्वक संभाला। नवजात के सफल उपचार और स्वस्थ जीवन के लिए आगे की प्रक्रिया जारी है।
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