प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र भारत सरकार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय भरत नाट्य समारोह का मंगलवार को समापन हुआ। समापन दिवस पर महाकवि भवभूति द्वारा रचित संस्कृत नाटक ‘महावीरचरितम्’ का मंचन किया गया। डॉ. हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन और संगीत परिकल्पना में प्रस्तुत इस नाटक में रामायण की कथा को आधुनिक नाटकीय शैली, फ्लैशबैक और बिंबों के माध्यम से दर्शाया गया। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. कीर्ति सिंह, विशिष्ट अतिथि घनश्याम शाही और अभिलाष मिश्रा ने किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय, डॉ. आदित्य कुमार श्रीवास्तव और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय भी उपस्थित थे। सभी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया। नाटक की कथा विश्वामित्र के यज्ञ से शुरू होकर रामायण के विभिन्न प्रसंगों को प्रस्तुत करती है। इसमें राम-लक्ष्मण और सीता-उर्मिला का मिलन, ताड़का वध, अहल्या उद्धार, शिवधनुष भंग और विवाह जैसे दृश्य शामिल थे। मंथरा, कैकेयी और रावण से जुड़े षड्यंत्रों को भी नाटकीय रूप में दर्शाया गया। इसके अतिरिक्त, वनवास, सीता हरण, जटायु वध, शबरी मिलन और लंका विजय तक की घटनाओं का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से नाटक को प्रभावी बनाया। अमिताभ आचार्य ने राम का किरदार निभाया, अमन व्यास ने लक्ष्मण की भूमिका अदा की। खुशी बघेल ने सीता की भूमिका निभाई। शुभराज शुक्ला ने रावण और परशुराम के दोहरे किरदार में अभिनय किया। ऋतुराज चौहान ने मंथरा का पात्र प्रस्तुत किया। समारोह के अंत में मुख्य अतिथि और नाट्य निर्देशक को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुधांशु शुक्ला ने किया।

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