महराजगंज जिले के मिठौरा विकास खंड की ग्राम पंचायत सोनवल में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पिछले 30 माह से खाली पड़ी है। शासनादेश के अनुसार, दुकान खाली होने के दो माह के भीतर नए विक्रेता का चयन अनिवार्य है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से लगातार देरी की जा रही है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामसभा में कोटा चयन के लिए कई बार खुली बैठकें आयोजित की गईं, लेकिन हर बार प्रक्रिया किसी न किसी कारण से टाल दी गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 27 जून 2025 को एक बैठक हुई, जिसमें नियमानुसार विकास स्वयं सहायता समूह के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि, इस प्रस्ताव को निराधार आरोपों के आधार पर रद्द कर दिया गया। इसके बाद, उपजिलाधिकारी सदर के निर्देश पर 27 जनवरी 2026 को फिर से बैठक बुलाई गई। इस बैठक में नोडल अधिकारी, नायब तहसीलदार, विभिन्न विभागों के सहायक विकास अधिकारी, एनआरएलएम विभाग के अधिकारी और ग्राम प्रधान मौजूद थे। अभिलेखों की जांच के बाद एक बार फिर स्वयं सहायता समूह के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया। खंड विकास अधिकारी मिठौरा ने 31 जनवरी 2026 को पत्रांक-1300 के माध्यम से यह प्रस्ताव उपजिलाधिकारी को भेजा, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। समूह की महिलाओं ने इस संबंध में तीन बार तहसील दिवस और जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। 19 मार्च 2026 को महिलाएं जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर भी बैठी थीं। उस समय अधिकारियों ने सात दिन के भीतर लाइसेंस जारी करने का भरोसा दिया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव के कारण एक विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर लाइसेंस जारी नहीं किया गया, तो वे 01 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

Leave a Reply