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महराजगंज में एसडीएम पर 1 लाख रुपए मांगने का आरोप:कोटे की दुकान आवंटन में देरी, महिलाओं का अनशन


                 महराजगंज में एसडीएम पर 1 लाख रुपए मांगने का आरोप:कोटे की दुकान आवंटन में देरी, महिलाओं का अनशन

महराजगंज में एसडीएम पर 1 लाख रुपए मांगने का आरोप:कोटे की दुकान आवंटन में देरी, महिलाओं का अनशन

महराजगंज के मिठौरा विकास खंड के ग्राम सोनवल की महिलाओं ने कोटे की दुकान के आवंटन में देरी और कथित भ्रष्टाचार के विरोध में गुरुवार को डीएम कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। विकास स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाओं का आरोप है कि उनके गांव में पिछले लगभग 30 माह से कोटेदार की मौत के कारण राशन दुकान खाली पड़ी है। इससे ग्रामीणों को राशन मिलने में भारी परेशानी हो रही है। महिलाओं ने बताया कि शासनादेश के अनुसार 7 जुलाई 2020 से पहले गठित सक्रिय स्वयं सहायता समूह को ही दुकान आवंटित की जानी है। इस प्रक्रिया के तहत ग्रामसभा में कई बार बैठक की तारीखें तय की गईं, लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने जानबूझकर तारीखें टालकर नियमों की अनदेखी की। खुली बैठक में समूह का प्रस्ताव फिर से पारित महिलाओं के अनुसार, उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 27 जून 2025 को हुई खुली बैठक में विकास स्वयं सहायता समूह का चयन किया गया था। हालांकि, उपजिलाधिकारी सदर ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद 27 जनवरी 2026 को ग्रामसभा की खुली बैठक में उसी समूह का प्रस्ताव फिर से पारित किया गया। खंड विकास अधिकारी ने 31 जनवरी 2026 को यह प्रस्ताव उपजिलाधिकारी को भेजा। महिलाओं का आरोप है कि इस प्रस्ताव को भेजे जाने के लगभग 50-60 दिन बीत जाने के बाद भी उपजिलाधिकारी द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने उपजिलाधिकारी सदर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लाइसेंस जारी करने के बदले एक लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य शासनादेश के अनुसार, इस तरह के मामलों में 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य है। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को तीन बार प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अनशनकारी महिलाओं ने भ्रष्टाचार की जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और विकास स्वयं सहायता समूह को तत्काल लाइसेंस जारी करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक अनशन जारी रहेगा। महिलाओं ने यह भी कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे मुख्यमंत्री आवास पर जाकर आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।


Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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