केन्द्र सरकार द्वारा देश में पूर्व से संचालित मनरेगा योजना में बदलाव कर उसे “जी राम जी, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन” के रूप में लागू किए जाने को लेकर कई मजदूर संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। नई योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों को साल में 125 दिन काम देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, मजदूर नेताओं का आरोप है कि पहले से मनरेगा के तहत एक परिवार को 100 दिन काम देने की गारंटी भी राज्य सरकार पूरी तरह से लागू नहीं कर सकी है। पूर्व पार्षद एवं बिहार इंटक के मजदूर नेता ताहिर हुसैन ने मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि यह नई योजना गरीब मजदूरों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि कागजों में काम के दिन बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। मनरेगा के तहत निबंधित मजदूर परिवारों की संख्या में भी लगातार कमी आ रही है, जो सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि फरवरी माह में चार लेबर कोड के साथ-साथ मनरेगा से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
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