बाराबंकी जनपद के जैदपुर स्थित मदरसा ‘दारुल उलूम आरफिया’ के प्रबंधकीय विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा जारी प्रबंधक के पंजीकरण आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद रियाज अहमद अब मदरसे के प्रबंधक पद पर नहीं रहेंगे। यह विवाद प्रबंध समिति के पंजीकरण और प्रबंधक पद की दावेदारी को लेकर लंबे समय से चल रहा था। डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स, अयोध्या ने 18 नवंबर 2025 को रियाज अहमद को प्रबंधक मानते हुए वर्ष 2025-26 की समिति सूची पंजीकृत की थी। मोहम्मद हारून ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद, उच्च न्यायालय ने 16 मार्च 2026 को डिप्टी रजिस्ट्रार के पंजीकरण को शून्य और अवैध घोषित करने का आदेश पारित किया। इस निर्णय के साथ, रियाज अहमद का प्रबंधक के रूप में पद समाप्त हो गया है। इस फैसले के बाद, दूसरे पक्ष के मोहम्मद हारून ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र सौंपा है। इसमें उन्होंने मदरसे में तत्काल ‘एकल संचालन व्यवस्था’ लागू करने की मांग की है। हारून ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्तमान में मदरसे में कोई वैध प्रबंधक नहीं है, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। मोहम्मद हारून ने मदरसा सेवा नियमावली 2016 की धारा 12(5) का हवाला देते हुए शिक्षकों और संस्थान के हित में जल्द से जल्द एकल संचालन व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है। उन्होंने एसडीएम नवाबगंज को भी प्रार्थना पत्र देकर धारा 25(1) के तहत आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है। हाई कोर्ट के आदेश की प्रति संलग्न करते हुए, उन्होंने संबंधित विभागों से शीघ्र हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि मदरसे में प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।

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