सहारनपुर के कस्बा देवबंद के मोहल्ला किला स्थित मदरसा इस्लामिया असगरिया दारूल मुसाफिरीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सोसायटी के सदस्य सैय्यद नबील हुसैन ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि संस्था पर कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, जाली हस्ताक्षर किए गए और कागजों में ही चुनाव कराकर नई कार्यकारिणी घोषित कर दी गई। मामला अब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) सहारनपुर की कोर्ट में पहुंच गया है। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर थाना सदर बाजार में मुकदमा दर्ज हुआ है। प्रार्थी के अनुसार, वर्ष 1973 में पंजीकृत इस सोसायटी में उनके पिता सैय्यद अकील हुसैन सचिव हैं और वे खुद भी सदस्य हैं। आरोप है कि संस्था में कार्यरत रहे सैय्यद अन्जर हुसैन ने अपने बेटों सैय्यद मोहम्मद तैय्यब, सैय्यद अली असगर और सैय्यद ताहिर के साथ मिलकर एक गिरोह बनाकर संस्था पर कब्जा करने की साजिश रची। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि आरोपियों ने 30 अक्टूबर 2021 और 30 दिसंबर 2022 की फर्जी आम बैठकें दर्शाकर दस्तावेज तैयार किए। इन बैठकों में कई सदस्यों के जाली हस्ताक्षर किए गए। यहां तक कि एक सदस्य को बैठक में उपस्थित दिखाया गया, जबकि वह उस समय इंग्लैंड में था। मामले में तब मोड़ आया जब सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स सोसायटी चिट्स सहारनपुर के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई गई। जांच के बाद 7 जुलाई 2023 को प्रस्तुत दस्तावेजों को फर्जी मानते हुए वर्ष 2023-24 की प्रबंध समिति की सूची को शून्य घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद आरोप है कि आरोपियों ने दोबारा फर्जी तरीके से चुनाव कराने की योजना बनाई। प्रार्थी के मुताबिक, 18 जून 2025 को कागजों में बैठक दिखाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई और 5 जुलाई को फर्जी नामांकन पत्र तैयार किए गए। 25 जुलाई 2025 को परिणाम घोषित कर सैय्यद अन्जर हुसैन को अध्यक्ष और सैय्यद मोहम्मद तैय्यब को सचिव दिखाया गया। 12 सितंबर 2025 को दिए गए शपथपत्र भी फर्जी बताए गए हैं। नबील हुसैन ने संस्था के फंड में गड़बड़ी और गबन का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस में शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने एसएसपी को प्रार्थना पत्र भेजा, लेकिन कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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