मथुरा-वृंदावन में गायों को सड़कों किनारे कूड़े के ढेरों में भोजन तलाशते देखा जा रहा है। यह स्थिति स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है, जिन्होंने नगर निगम की सफाई व्यवस्था और गौ संरक्षण के दावों पर सवाल उठाए हैं। धार्मिक नगरी मथुरा और वृंदावन के विभिन्न क्षेत्रों में, जहां गायों को पवित्र माना जाता है, वहीं वे प्लास्टिक और सड़ी-गली सामग्री खाने को मजबूर हैं। यह दृश्य लंबे समय से बना हुआ है और इसमें सुधार के ठोस प्रयास नहीं दिख रहे हैं। स्थानीय निवासी हरीश गुप्ता ने शहर की सफाई व्यवस्था को चरमराया हुआ बताया। उन्होंने कहा कि जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और गायें इन्हीं में पेट भरने को विवश हैं। अजीत सिंह ने भी प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि गौ संरक्षण के बड़े-बड़े दावों के बावजूद गायों के लिए पर्याप्त गौशालाएं और उचित देखभाल की व्यवस्था नहीं है। लोगों का आरोप है कि मथुरा-वृंदावन नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर में गंदगी बढ़ रही है और आवारा पशुओं की हालत बदतर होती जा रही है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार अधिकारियों के ध्यान देने और ब्रज की पहचान मानी जाने वाली गायों को सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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