लगातार बढ़ रही गैस की किल्लत का असर अब ब्रज में देखने को मिल रहा है। यहां के मंदिर और सार्वजनिक रसोई में गैस सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही है। इस्कॉन मंदिर में अब लकड़ी और कोयले का प्रयोग कर भट्टी चलाई जा रही है तो जगन्नाथ मंदिर की रसोई को बंद कर दिया गया है। 400 लोग करते थे प्रतिदिन भोजन वृंदावन के परिक्रमा मार्ग में स्थित जगन्नाथ मंदिर में पिछले 5 साल से सार्वजनिक रसोई चल रही थी। यहां प्रतिदिन 400 लोग भोजन करते थे। इसके अलावा भीड़ वाले दिन और एकादशी पर यह संख्या 800 तक पहुंच जाती थी। इस रसोई में भक्त तो भोजन करते थे लेकिन उनकी संख्या ज्यादा थी जो जरूरतमंद होते थे। यह दिया जाता था भोजन जगन्नाथ रसोई में प्रतिदिन 2 सब्जी , दाल,चावल,रोटी और एक मिठाई दी जाती थी। यह सभी भोजन गैस से चलने वाली मशीनों से बनाया जाता था। प्रतिदिन यह भोजन बनाने में 5 सिलेंडर का प्रयोग होता था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की आपूर्ति न होने के कारण यहां भोजन बनाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सिलेंडर न मिलने से अब यह रसोई बंद करनी पड़ी है। भगवान की होती थी सेवा रसोई का संचालन कर रहे मुरारी महाराज ने बताया भगवान जगन्नाथ की कृपा से यह सेवा शुरू की थी। लेकिन पिछले कुछ समय से सिलेंडर की किल्लत की वजह से यह सेवा बंद करनी पड़ी है। इसके लिए रसोई के दरवाजे पर एक नोट भी चिपका दिया गया है। इस समय यहां केवल रसोई में काम करने वाले कर्मचारी ही भोजन कर रहे हैं। मुरारी महाराज ने बताया कि 25 दिन में 4 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। इस्कॉन के प्रसाद में किया बदलाव अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण गहराए गैस संकट से अब ब्रज के मंदिरों में असर पड़ने लगा है। वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में सिलेंडर की कमी के चलते भक्तों को मिलने वाले प्रसाद और रेस्टोरेंट में बनने वाले भोजन के मेन्यू में बदलाव किया गया है। इस्कॉन मंदिर के PRO रवि लोचन दास ने बताया कि प्रतिदिन एक हजार भक्तों को प्रसाद खिलाया जाता था। जिसमें दो सब्जी,रोटी,चावल और दाल शामिल था। रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत की वजह से अब केवल खिचड़ी का प्रसाद दिया जा रहा है।

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