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मजदूरों की कब्रगाह बना कोल्ड स्टोरेज, 4 घंटे तक कोहराम:हर तरफ चीख-पुकार, प्रयागराज में नीचे दबे लोगों के घरवालों की चीखों से दहले लोग

प्रयागराज के फाफामऊ में कोल्ड स्टोरेज का एक हिस्सा ढहने के बाद मौके पर चार घंटे तक कोहराम मचा रहा। हर तरफ चीख-पुकार मची रही। कोई अपने भाई तो कोई अपने साथी को बदहवास तरीके से खोज रहा था। उधर मृतकों के परिवारवालों की चीखें लोगों के कलेजों को दहलाती रही। शाम पांच बजे तक अफरातफरी का आलम बना रहा। धमाके जैसी आवाज आई
स्थानीय निवासी मुदस्सिर ने बताया, दोपहर 1:30 बजे का वक्त था। मेरा घर कोल्ड स्टोरेज से चंद कदमों की दूरी पर है। अचानक बहुत जोर की आवाज आई। धमाके जैसी आवाज थी। यह आवाज थमती, इससे पहले ही लोगों के चीखने-पुकारने की आवाजें आने लगीं। मैं भागकर मौके पर पहुंचा। सामने जो दिखाई दिया, उसे देखकर कलेजा कांप गया। कोल्ड स्टोरेज का आगे का हिस्सा ढहा हुआ था। हजारों टन के वजन वाला बिल्डिंग का मलबा जमीदोंज पड़ा था। मजदूर चीख रहे थे और मलबे के नीचे दबे अपने साथियों को निकाल रहे थे। कुछ ही देर बाद मलबे के नीचे से निकालकर एक मरणासन्न हो चुके साथी को टांगकर मजदूर बाहर लेकर जाते दिखे। तब तक गांव के सैकड़ों लोग भी आ गए। करीब आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची और फिर एक-एक कर मौके पर एंबुलेंस की कई गाड़ियां पहुंच गईं। हादसे की तस्वीरें देखिए- चीखपुकार के बीच मजदूरों ने रोकी एंबुलेंस
मौके के ही एक अन्य चश्मदीद सिराज ने बताया, घायलों को अस्पताल भेजवाया जा रहा था और इसी दौरान खबर फैली कि एक की मौत हो चुकी है। इसके बाद दो अन्य मजदूर निकाले गए जिनके शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। पुलिस ने दोनों के शव एंबुलेंस में रखे तो मजदूरों ने रास्ता रोक लिया। उनका कहना था कि मरे हुए मजदूरों की लाश को आननफानन में हटाया जा रहा है। पुलिस ने समझाया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए और एंबुलेंस के आगे खड़े हो गए। जबरन उतार लीं लाशें
करीब 10 मिनट तक मान-मनौव्वल चलती रही और इसके बाद पुलिस ने सामने खड़े मजदूरों को हटाते हुए एंबुलेंस आगे बढ़वा दी। पुलिस के हटाने पर एकबारगी तो मजदूर छिटक गए लेकिन जैसे ही एंबुलेंस निकली वह पीछे दौड़ पड़े। इसके बाद जैसे ही एंबुलेंस कोल्ड स्टोरेज परिसर से निकलकर हाईवे तक जाने वाले रूदापुर गांव के संपर्क मार्ग पर पहुंची, पीछे से दौड़कर आए मजदूरों ने एंबुलेंस जबरन रोक ली। फिर अपने दोनों साथियों के शव भी नीचे उतार लिया और इसे ले जाकर कोल्ड स्टोरेज परिसर में ही बाएं ओर बने रसोईघर के स्टोर में रखकर बाहर से ताला लगा दिया। डीसीपी के समझाने पर माने
मजदूरों में जबरदस्त आक्रोश था। उनका कहना था कि पुलिस प्रशासन शव हटवाकर मामला रफा-दफा करना चाहता है। मौके पर पहुंचे एसीपी थरवई अरुण पाराशर ने समझाया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। करीब 15 मिनट तक एसीपी मजदूरों को समझाते रहे। इसके बाद डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत पहुंचे। उन्होंने मजदूरों को समझाया। कहा कि मुआवजा या अन्य किसी भी तरह की मदद के लिए जरूरी है कि मृतकों का पोस्टमार्टम कराया जाए। उनके समझाने पर मजदूर माने और इसके बाद ताला खुलवाकर शाम 5:30 बजे दोनों शव मर्चरी भेजवाए गए। तब जाकर स्थिति सामान्य हो पाई। गले लगकर रोया भाई औ बेटा
इस हादसे में जिन मजदूरों की मौत हुई, उनमें बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले 30 साल के मसिंदर और वहीं के 25 साल के बिलट चौधरी भी शामिल हैं। मसिंदर का भाई मनीष साथी मजदूर के गले लगकर फूट-फूटकर रोता रहा। वह कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं था। हमने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वह कुछ कह नहीं पाया। उधर बिलट का 14 साल का बेटा नंदन भी बिलखता रहा। बताया पापा खाना खाने के बाद कोल्ड स्टोरेज में ऑफिस के पास आराम कर रहे थे। अचानक तेज आवाज हुई और बिल्डिंग गिर गई। इसमें पापा दब गए। लोगों ने उन्हें निकाला तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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