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मऊ में 22 दिन बाद बच्चे की हत्या का केस:सीएम ऑफिस के हस्तक्षेप के बाद पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई, मां के साथ तिलक में आया था

मऊ जिले में एक पांच वर्षीय बच्चे की अप्राकृतिक कुकर्म के बाद हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने घटना के 22 दिन बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। यह घटना 27 फरवरी को घोसी कोतवाली के एक गांव में हुई थी। बच्चे की मां अपने बेटे के साथ अपने भाई के तिलकोत्सव में शामिल होने ससुराल आई थीं। 27 फरवरी को तिलक समारोह से एक दिन पहले बच्चा अचानक लापता हो गया था। अगले दिन बच्चे का शव स्थानीय पोखरी से बरामद हुआ। बच्चे की स्थिति देखकर परिजनों को संदेह हुआ, जिसके बाद चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसमें बच्चे के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जिसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी हुई थी। बच्चे के मामा ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने 1 मार्च को थाने में मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया था। पुलिस ने तब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। पीएम रिपोर्ट आने के बाद 13 मार्च को वह दोबारा घोसी कोतवाली पहुंचे और कार्रवाई की मांग की, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मामा ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद पुलिस ने तीन नामजद और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। इस पूरे मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब बच्चे की मौत हुई थी, तब परिजनों ने डूबने से मौत होने की बात कही थी। इसके बाद वे शव को लेकर उत्तराखंड चले गए थे, जहां पोस्टमॉर्टम और अन्य औपचारिकताएं पूरी की गईं। अपर पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की कि अब मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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