बरेली की शहर विधानसभा वही सीट है, जिसने उत्तर प्रदेश को पहला मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत दिया था। राजनीति के इस ऐतिहासिक गढ़ में आज भी विकास और विरासत की जंग जारी है। इस सीट से लगातार तीसरी बार के विधायक और प्रदेश सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दैनिक भास्कर से बातचीत में मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा- कुतुबखाना ओवरब्रिज का निर्माण मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता और उपलब्धि रही है। इसके बनने से बीच शहर में लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिली है। पेश है डॉ. अरुण सक्सेना से खास बातचीत… सवाल: पिछले 4 साल के कामकाज के आधार पर आप खुद को 10 में से कितने नंबर देंगे?
जवाब: अभी तो कार्यकाल का एक साल और बाकी है। पूरा काम देख कर ही सही आकलन हो पाएगा। वैसे भी, अपने नंबर खुद नहीं दिए जाते, लोकतंत्र में नंबर देने का अधिकार सिर्फ जनता के पास है। जनता जो तय करेगी, वही मेरा स्कोर होगा। सवाल: आपके अब तक के कार्यकाल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण काम कौन सा रहा?
जवाब: कुतुबखाना ओवरब्रिज का निर्माण मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता और उपलब्धि रही है। इसके बनने से बीच शहर में लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिली है। इसके अलावा IVRI रोड पर पुल और उसका अंडरपास बनवाया, ताकि यातायात सुगम हो सके। पिछले कार्यकाल में हमने इज्जतनगर के उदेशिया फाटक पर अंडरपास बनवाया था, जिससे उस पार की बड़ी आबादी को राहत मिली। बरेली में आईटी पार्क और ईएसआई (ESI) अस्पताल का निर्माण भी हमारे विजन का हिस्सा है। सवाल: रोजगार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में आपकी क्या उपलब्धि रही?
जवाब: हमने बरेली में नई इंडस्ट्रीज लाने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। काफी युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है, लेकिन अभी इस दिशा में बहुत काम बाकी है। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए हमने रिकॉर्ड स्तर पर ‘स्वयं सहायता समूह’ बनवाए हैं ताकि वे घर बैठे अपनी आमदनी कर सकें। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जो आप चाहते हुए भी अब तक पूरा नहीं करा पाए?
जवाब: रबर फैक्ट्री का मामला मेरे लिए सबसे प्रमुख है। करीब 1400 एकड़ जमीन का कानूनी विवाद चल रहा है। मेरी पूरी कोशिश है कि यह मुकदमा जल्द सुलझे और सरकार को जमीन वापस मिले। यदि वह जमीन मुक्त होती है, तो वहां एक विशाल ‘इंडस्ट्रियल बेल्ट’ बनाएंगे, जिससे बरेली के हजारों युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं भागना पड़ेगा। सवाल: चुनाव नजदीक है, क्या इस बार भी आप टिकट के दावेदार होंगे?
जवाब: मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं। अगर पार्टी टिकट देगी तो बहुत अच्छी बात है और पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन जब तक संगठन की ओर से ‘हां’ या ‘ना’ नहीं हो जाता, तब तक दावेदारी पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। सब कुछ नेतृत्व पर निर्भर है।

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