सरकारी दस्तावेजों में भूमिहार जाति के लोगों को भूमिहार ब्राह्मण लिखने या नहीं लिखने पर सवर्ण आयोग (उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग ) के भीतर ही विवाद पैदा हो गया है। आयोग के 5 में से 4 सदस्य इसके खिलाफ हैं। इसी कारण 21 नवंबर और 8 दिसंबर को दो बैठकों के होने के बाद भी आयोग कोई फैसला नहीं ले सका। तीसरी बैठक में भी अगर फैसला नहीं हुआ तो गेंद आयोग के पाले से निकलकर राज्य सरकार के हवाले हो जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव की ओर से बीते 10 अक्टूबर को सवर्ण आयोग को पत्र भेजकर यह मार्गदर्शन मांगा गया कि सरकारी दस्तावेजों में भूमिहार जाति को भूमिहार ब्राह्मण लिखा जाय या नहीं? राज्य सरकार के पत्र के बाद आयोग ने इसकी मांग करने वालों से सबूत जमा करने के लिए कहा। इसके अलावा भूमिहार के बदले भूमिहार ब्राह्मण लिखने का विरोध करने वालों से भी आयोग के पास साक्ष्य जमा करने के लिए कहा गया। आयोग के अंदर की कहानी- क्या है पक्ष और विपक्ष भूमिहार ब्राह्मण के पक्ष में… भूमिहार ब्राह्मण के विपक्ष में… आगे क्या होगा सवर्ण आयोग की तीसरी बैठक में भी भूमिहार या भूमिहार ब्राह्मण में किसी एक के लिखने पर सहमति नहीं बनी तो वोटिंग से फैसला हो सकता है। आयोग के चेयरमैन इस पर वीटो लगाकर आयोग के एजेंडे से इसे बाहर कर सकते हैं। भूमिहार कहें या भूमिहार ब्राह्मण-क्यों है विवाद अवधेश मिश्र और अंजनी कुमार बेनीपुरी ने राज्य सरकार के पास आवेदन दिया कि सरकारी दस्तावेजों में गलत तरीके से उनकी जाति को भूमिहार ब्राह्मण की जगह भूमिहार लिखा जा रहा है। ऐसा जातीय जनगणना की रिपोर्ट में गलत अंकित होने के कारण किया जा रहा है। इसी आवेदन के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने सवर्ण आयोग से मार्गदर्शन मांगा कि भूमिहार जाति के लोगों को भूमिहार लिखा जाय या भूमिहार ब्राह्मण।
https://ift.tt/1vcYXNC
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply