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भारत में एंट्री लेते ही 21 दिन में डील डन कराया, ट्रंप के खास दूत ने टैरिफ विवाद कैसे सुलझाया?

तमाम तनातनी के बीच भारत और अमेरिका के बीच आखिरकार महीनों चला ट्रेड वॉर खत्म हो गया है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील पर सहमति भी बन गई है। ट्रंप ने टेरिफ कैसे घटाया? क्यों घटाने पर मजबूर हुए? और डील की पूरी कहानी क्या है? तमाम पहलुओं पर बात करने के साथ ही आपको बताते हैं कि ट्रंप के खास दूत ने कैसे भारत में दस्तक देने के महज 21 दिनों के भीतर ही टैरिफ विवाद को सुलझा कर डील डन करवा दिया। जी हां, बात अमेरिका के राजदूत और ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सार्जियो गोर की कर रहे हैं। आपको बता दें कि पिछले  21 दिन बहुत अहम है। पिछले 21 दिनों में भारत और अमेरिका के बीच काफी कुछ हुआ। दोनों तरफ से तमाम अधिकारियों और नेताओं के बीच मुलाकातें हुई। भारत के भी कुछ मंत्री अमेरिका के दौरे पर गए और अमेरिका के भी कई अधिकारी भारत के दौरे पर आए। इसमें जो सबसे अहम किरदार रहा वो ट्रंप के खास दूत सर्जियो गौर का रहा।

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कौन हैं सार्जियो गोर

गोर का जन्म नवंबर 1986 में ताशकंद, उज़्बेकिस्तान में हुआ था, जब वह सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (USSR) का हिस्सा था। उनका परिवार 1999 में अमेरिका आ गया था। उन्होंने 2020 में पहले मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) कैंपेन के दौरान ट्रम्प के साथ काम करना शुरू किया। 2024 में ट्रम्प के पदभार ग्रहण करने के बाद, उन्हें व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय का निदेशक नियुक्त किया गया। 38 वर्षीय गोर को जनवरी के महीने में ट्रंप ने अमेरिका का सबसे युवा  राजदूत बनाकर भारत भेजा। सितंबर में सीनेट की विदेश संबंध समिति में अपनी नियुक्ति की पुष्टि सुनवाई के दौरान, गोर ने कहा था कि भारत एक रणनीतिक साझेदार है जिसका भविष्य इस क्षेत्र और उससे आगे के विकास को प्रभावित करेगा।

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भारत आते ही काम पर लग गए गोर

अपना पदभार संभालने के बाद सरियो गौर ने कहा कि डील पर चर्चा की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सच्ची दोस्ती है और सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं। लेकिन आखिर में वे हमेशा मतभेदों को सुलझा लेते हैं। यह बड़ा बयान उनकी तरफ से माना गया और सर्जियो गौर का यह बयान ऐसे वक्त में आया था जब कुछ अमेरिकी अधिकारी लगातार डील पर  साइन करने में देरी को लेकर भारत को ही जिम्मेदार ठहरा रहे थे। तब भारत ने भी अमेरिकी अमेरिकी दावे को खारिज किया था। मतलब भारत झुकने वाला नहीं था। आखिरकार अब डील फाइनल हो चुकी है और इसमें सर्जियो गौर की भी भूमिका बहुत अहम मानी जा रही है क्योंकि सर्जियो गौर ट्रंप के बेहद खास माने जाते हैं।


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