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भारत का संविधान बहुत विस्तृत और सशक्त, जब तक देश है, संविधान की प्रासंगिकता भी बनी रहेगी

भास्कर न्यूज|मधुबनी हिन्दी साहित्य समिति, मधुबनी के तत्त्वावधान में शुभ अंगना प्रोफेसर्स कालोनी, सुन्दर नगर, मधुबनी में संगोष्ठी व कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित की गई थी। प्रथम सत्र में संविधान की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी एवं द्वितीय सत्र में कविगोष्ठी अधिवक्ता ऋषि देव सिंह की अध्यक्षता, प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल के संचालन में आयोजित हुई। प्रथम सत्र में विषय प्रवेश कराते हुए समिति के संयोजक पंकज सत्यम ने कहा भारत का संविधान बहुत विस्तृत, सशक्त और सुनियोजित है। प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल ने कहा कि संविधान देश की आत्मा है। जब तक यह देश है संविधान की प्रासंगिकता बनी रहेगी, वेदानंद साह ने कहा कि संविधान देश का प्रहरी है, सुभेष चन्द्र झा ने कहा कि भारत का संविधान पश्चिम और पूर्व का समन्वय है, डॉ. विनय विश्वबंधु कहा कि संविधान देश को दिशा-निर्देश देता है, ऋषि देव सिंह ने कहा कि अनेक देशों के अच्छे तत्वों का निचोड़ है। द्वितीय सत्र कवि गोष्ठी में मां सरस्वती वंदना कवयित्री अनुपम झा द्वारा सस्वर प्रस्तुत करने से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक हो गया। दयाशंकर मिथिलांचली की कभी-कभी मौन भी रहना जरूरी है, आध्यात्मिक कवि भोलानंद झा की पुष्प की वृष्टि हो रही है, बाल कलाकार-कवि गोपाल झा की सोचा था उसने छूना तो है आसमान को, कवयित्री अनामिका चौधरी की शत-शत नमन उन्हें जो रचा अपना संविधान, डॉ. विनय विश्वबंधु की संस्कृति आ सभ्यता संग लोक मर्यादा, अनुपम झा की बिना तेल के बाती जले ना, सुभेष चन्द्र झा की हास्य कविता मुनचुन राय चुनाव लड़ताह ने सबको गुदगुदाया। पंकज सत्यम की सबसे न्यायोचित संविधान हमारा है, प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल की गाम हमर आब गाम नै रहलै ने ध्यान आकृष्ट किया।


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