भारतेन्दु नाट्य समारोह में ‘पूर्णावतार’ का मंचन:राज बिसारिया प्रेक्षागृह में दर्शकों ने सराहा, दिल्ली के क्षितिज ग्रुप की प्रस्तुति


                 भारतेन्दु नाट्य समारोह में 'पूर्णावतार' का मंचन:राज बिसारिया प्रेक्षागृह में दर्शकों ने सराहा, दिल्ली के क्षितिज ग्रुप की प्रस्तुति

भारतेन्दु नाट्य समारोह में ‘पूर्णावतार’ का मंचन:राज बिसारिया प्रेक्षागृह में दर्शकों ने सराहा, दिल्ली के क्षितिज ग्रुप की प्रस्तुति

लखनऊ के राज बिसारिया प्रेक्षागृह में भारतेन्दु नाट्य स्वर्ण जयंती समारोह चल रहा है। 5 से 12 अप्रैल तक आयोजित इस समारोह में विभिन्न नाटकों का मंचन हो रहा है। दिल्ली के चर्चित क्षितिज थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘पूर्णावतार’ ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। सभागार में दर्शकों ने प्रस्तुति को खूब सराहा। इस नाटक का रूपांतरण और निर्देशन भारती शर्मा ने किया है। यह प्रस्तुति प्रसिद्ध साहित्यकार प्रमथनाथ बिशी के उपन्यास पर आधारित है। नाटक अपनी प्रयोगात्मक शैली और गहरे दार्शनिक विषय के कारण दर्शकों को विचार करने पर मजबूर करता है। भगवान कृष्ण को सार्वभौमिक शक्ति के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया ‘पूर्णावतार’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि आत्ममंथन की एक गहरी यात्रा है। इसमें जीवन के शाश्वत चक्र, ‘स्व’ और ‘परम’ की खोज को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है। भगवान कृष्ण को यहाँ सृजन, अस्तित्व और हर व्यक्ति के भीतर मौजूद सार्वभौमिक शक्ति के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है।नाटक की कहानी जरा नामक एक साधारण शिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है। जरा अनजाने में भगवान कृष्ण की मृत्यु का कारण बन जाता है। इस घटना के बाद वह अपराधबोध से घिर जाता है और उसकी आत्मिक यात्रा शुरू होती है। इस यात्रा में जरा कई पात्रों से मिलता है यह यात्रा केवल बाहरी नहीं, बल्कि उसके भीतर चल रहे संघर्ष और आत्मबोध की कहानी बन जाती है। अपनी इस यात्रा में जरा कई पात्रों से मिलता है, जो कहीं न कहीं कृष्ण के ही अंश प्रतीत होते हैं। धीरे-धीरे उसे यह एहसास होता है कि सच्चाई से भागना संभव नहीं है।अंततः वह अपने भीतर के सत्य को स्वीकार करता है और उसे आत्मबोध की अनुभूति होती है। नाटक का अंत एक गहरी सीख के साथ होता है, जहाँ जरा जीवन की कठोर और सुंदर दोनों सच्चाइयों को स्वीकार करता है। मंच पर वैभव त्रिपाठी ने जरा, शशिकांत वत्स ने वासुदेव, आशीष शर्मा ने चार्वाक और प्रभात मिश्र ने खटास की भूमिका निभाई। वहीं, अन्य कलाकारों ने भी सशक्त प्रस्तुति देकर नाटक को यादगार बनाया।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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