भागलपुर में हाई कोर्ट खंडपीठ की स्थापना की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। शनिवार को इसी मांग को लेकर जिले के सैकड़ों अधिवक्ता समाहरणालय के गेट नंबर-3 पर जुटे और एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया। अधिवक्ताओं ने कहा कि भागलपुर में खंडपीठ की मांग कोई नई नहीं है, बल्कि यह कई दशक पुरानी आवाज है, जिसे हर सरकार ने अनसुना किया है। धरना को संबोधित करते हुए जिला विधिज्ञ संघ के महासचिव अंजनी कुमार ने कहा कि भागलपुर और आसपास के जिलों के लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए पटना हाई कोर्ट तक 250 से 300 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इससे आम जनता को आर्थिक, समयगत और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते मामलों की संख्या और पूर्व बिहार के करोड़ों की आबादी को देखते हुए भागलपुर में हाई कोर्ट की खंडपीठ स्थापित करना बेहद जरूरी है। वकील बोले- खंडपीठ की स्थापना से न्यायिक व्यवस्था को तेजी मिलेगी अधिवक्ताओं ने कहा कि भागलपुर एक ऐतिहासिक शहर है, जहां विधि शिक्षा, न्यायिक संस्थानों और प्रशासनिक ढांचे की मजबूत उपस्थिति है। यहां खंडपीठ की स्थापना से न्यायिक व्यवस्था को गति मिलेगी और आसपास के जिलों बांका, मुंगेर, गोड्डा, साहेबगंज, लखीसराय, जमुई सहित पूरे कोसी-पूर्वी बिहार क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। धरना में उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि पटना हाई कोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए भी यह कदम जरूरी है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई में होने वाली देरी लोगों को न्याय से दूर कर रही है। धरना स्थल पर वक्ताओं ने राज्य सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में कई बार यह मांग उठाई गई, ज्ञापन सौंपे गए, रैलियां निकाली गईं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि अब वे आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप देंगे। अधिवक्ताओं ने सरकार से जल्द से जल्द भागलपुर में हाई कोर्ट खंडपीठ स्थापित करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र के लाखों लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए दूर-दराज की यात्रा न करनी पड़े और न्याय तक आसान व तेज़ पहुंच सुनिश्चित हो सके।
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