भाई की हत्या और सबूत मिटाने के सात साल पुराने मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दो सगे भाइयों को बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। एडीजे मृदुल दुबे की अदालत ने रामनरेश और दीवान सिंह निवासी ग्राम छत्तापुरा, थाना इरादतनगर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां आपस में जुड़ती नहीं हैं, जिससे आरोप सिद्ध नहीं होते। अभियोजन के अनुसार, वादिनी पूनम देवी ने आरोप लगाया था कि उनके पति पूरन सिंह का अपने भाइयों से जमीन और संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। घटना से कुछ दिन पहले इसी बात को लेकर झगड़ा भी हुआ था, जिसे परिजनों ने शांत कराया था। 19 नवंबर 2019 की रात पूरन सिंह घर से दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। करीब पांच दिन बाद उनका शव कब्र में दबा मिला। इसके बाद पूनम देवी ने अपने जेठ और देवर के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने का मुकदमा दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।

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