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बैंकर्स के आगे बेबस ‘सरकार’, एमएसएमई मंत्री ने लगाई फटकार:सीएम जब गारंटी ले रहे तो लोन देने में कैसी आफत, प्राइवेट बैंकों की स्थिति सबसे खराब

यूपी की योगी सरकार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के तहत करोड़ों का बजट लुटाने को तैयार है, लेकिन जमीन पर बैंकर्स ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की फाइलें दबा रखी हैं। शनिवार को बरेली के अर्बन हाट में आगरा, अलीगढ़ और बरेली मंडल की समीक्षा बैठक के दौरान एमएसएमई मंत्री राकेश सचान बैंक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के आगे बेहद असहाय और तल्ख नजर आए।
मंत्री ने सीधे शब्दों में बैंकर्स से सवाल किया कि जब योजना की 100% गारंटी और ब्याज सरकार दे रही है, तो फिर युवाओं को चक्कर क्यों लगवाए जा रहे हैं? उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बैंक अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारते, तो उनका नाम सरकारी योजनाओं के पोर्टल से हटवा दिया जाएगा। प्राइवेट बैंकों की खुली पोल, रिजेक्शन रेट देख भड़के मंत्री
बैठक में जब आंकड़ों की बाजीगरी सामने आई तो मंत्री सचान का पारा चढ़ गया। समीक्षा में पाया गया कि प्राइवेट बैंकों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत आए 90% आवेदनों को बिना किसी ठोस कारण के रिजेक्ट कर दिया है। सरकारी बैंकों की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां 60% फॉर्म खारिज किए जा चुके हैं। मंत्री ने सख्त लहजे में कहा, “प्राइवेट बैंक बड़े लोन तुरंत दे देते हैं, लेकिन जब 5 लाख के छोटे लोन की बात आती है जिससे गरीब युवा का घर चलना है, तो वे हाथ पीछे खींच लेते हैं। सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है।” सत्ता और विपक्ष एक सुर में, विधायकों ने भी उठाए प्रश्नचिन्ह
मंत्री राकेश सचान ने विधानसभा के सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि केवल जनता ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के करीब दो दर्जन विधायकों ने सदन में बैंकर्स की मनमानी का मुद्दा उठाया है। नेता प्रतिपक्ष ने भी कहा कि योजना बेहतरीन है लेकिन बैंक वाले पैसा नहीं दे रहे। मंत्री ने बैंक अधिकारियों को आइना दिखाते हुए कहा कि कोई ऐसा जनप्रतिनिधि नहीं था जो बैंकर्स की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह न लगा रहा हो। उन्होंने साफ कहा कि युवाओं की अपेक्षाएं सरकार से हैं और बैंक उन्हें निराश कर रहे हैं। 25 मार्च तक का अल्टीमेटम, ‘होली-ईद’ की छुट्टी में भी करना होगा काम
चूंकि वित्तीय वर्ष की समाप्ति नजदीक है, इसलिए मंत्री ने बैंकर्स को दो टूक सुना दिया कि 25 मार्च के बाद कुछ नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि 25 मार्च को पूरे प्रदेश में मेगा ऋण कैंप लगाए जाएंगे। उन्होंने बैंकर्स से भावुक अपील भी की कि आज नवरात्रि और ईद का दिन है, आप लोग छुट्टी के बावजूद आए हैं, लेकिन मार्च क्लोजिंग का महीना है। अपने दिल और दिमाग से उन लाभार्थियों को लाभ दें जिन्होंने आवेदन किया है। बरेली मंडल में अभी भी 5000 लोन का गैप है, जिसे हर हाल में इसी हफ्ते पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। बजट की कमी नहीं, ‘घड़ी’ डिटर्जेंट का दिया उदाहरण
सचान ने बैंकर्स को प्रेरित करने के लिए कानपुर के ‘घड़ी डिटर्जेंट’ का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे 80 के दशक में खादी ग्रामोद्योग से छोटा सा लोन लेकर एक व्यक्ति आज उत्तर प्रदेश का नंबर एक उद्यमी बन गया। उन्होंने कहा, “अगर आप आज किसी को 5 लाख देंगे, तो कल वह बड़ा होकर औरों को रोजगार देगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास बजट की कोई कमी नहीं है। अगर लक्ष्य 1.5 लाख का है और बैंक 3 लाख लोगों को लोन दे दे, तो भी सरकार सब्सिडी और ब्याज देने में सक्षम है। अफसरों को हिदायत: कागज की कमी है तो खुद पूरा करवाएं
मंत्री ने जिला उद्योग अधिकारियों को भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि कई बार आवेदन केवल इसलिए रिजेक्ट हो जाते हैं क्योंकि कागजों में छोटी-मोटी कमी होती है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे युवाओं का सही मार्गदर्शन करें और कमियां खुद पूरी करवाकर बैंकों को दोबारा फाइल भेजें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पोर्टल पर ‘रिजेक्ट’ करने का विकल्प ही नहीं है ताकि बैंकर्स को मजबूरी में लोन डिस्बर्स करना ही पड़े।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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