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बेल्थरा रोड का सोनाडीह मेला 27 मार्च से होगा शुरू:प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, तैयारियां पूरी


                 बेल्थरा रोड का सोनाडीह मेला 27 मार्च से होगा शुरू:प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, तैयारियां पूरी

बेल्थरा रोड का सोनाडीह मेला 27 मार्च से होगा शुरू:प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, तैयारियां पूरी

बेल्थरा रोड क्षेत्र का ऐतिहासिक सोनाडीह मेला इस बार 27 मार्च से पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू होने जा रहा है। चैत्र नवरात्र और रामनवमी के पावन अवसर पर लगने वाला यह मेला न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने भीतर एक समृद्ध पौराणिक इतिहास भी समेटे हुए है। पौराणिक मान्यता और इतिहास
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सोनाडीह क्षेत्र मां परमेश्वरी व मां भागेश्वरी की तपस्थली और विजय स्थल के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि जब क्षेत्र में राक्षसों का आतंक बढ़ गया था, तब देवी शक्ति ने उनका संहार कर यहीं विश्राम किया था। किंवदंती यह भी है कि हाहा और हूहू नामक दैत्यों ने देवी से विवाह का प्रस्ताव रखा था, जिस पर देवी ने उन्हें सूर्योदय तक घाघरा नदी का बहाव मोड़ने की चुनौती दी। असफल होने पर देवी ने उनका वध कर दिया।
इसके अलावा रक्तबीज, मधु-कैटभ, शुंभ-निशुंभ जैसे असुरों के संहार से जुड़े कई स्थल आज भी आसपास के गांवों में बताए जाते हैं, जो इस मेले की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और गहरा करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था बनी प्राथमिकता
इतिहास और आस्था के इस संगम को सुरक्षित बनाए रखने के लिए इस बार प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उभांव थाना प्रभारी संजय शुक्ला ने पुलिस टीम के साथ बुधवार की रात मेला स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
मेला व्यवस्थापक अच्युत प्रताप उर्फ सन्नी सिंह और पुजारी से बातचीत कर जमीनी स्थिति समझी गई और आवश्यक निर्देश दिए गए। जागरूकता के साथ सुरक्षा
पूरे मेले के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से श्रद्धालुओं को लगातार सतर्क किया जाएगा। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ लोगों को जागरूक भी किया जाएगा, ताकि मेला शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो सके। आस्था और परंपरा का उत्सव
सोनाडीह मेला हर वर्ष क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करता है। मां परमेश्वरी व मां भागेश्वरी के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहीं मेले में लगने वाली दुकानें, झूले और पारंपरिक आयोजन इसकी रौनक बढ़ाते हैं। इस तरह सोनाडीह मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आता है, जहां हर साल हजारों लोगों की आस्था एक साथ जुड़ती है।


Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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