बेमौसम बारिश और कोयले की कीमतों में तेज उछाल ने ईंट भट्ठा उद्योग को संकट में डाल दिया है। उत्पादन लागत बढ़ने और कच्चे माल के नुकसान के चलते अब ईंटों के दाम बढ़ना तय माना जा रहा है। लखनऊ और आसपास के जिलों में नई दरें लागू भी कर दी गई हैं, जिसका असर सीधे निर्माण कार्यों और आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।
कोयले की कीमतों में उछाल से बढ़ी उत्पादन लागत
भट्ठा संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ समय में कोयले की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। ईंट पकाने में कोयला सबसे अहम ईंधन होता है, ऐसे में इसकी महंगाई ने सीधे उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है।
लखनऊ ब्रिक क्लिन एसोसिएशन के महामंत्री शेषमणि तिवारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते यूएसए से आने वाले कोयले के दाम में करीब 7000 रुपये प्रति टन तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे भट्ठा उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
बेमौसम बारिश से कच्ची ईंटों को भारी नुकसान
बारिश ने ईंट उत्पादन को बड़ा झटका दिया है। भट्ठों पर तैयार की जा रही कच्ची ईंटें बारिश में खराब हो गईं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
कई भट्ठों को अस्थायी रूप से काम रोकना पड़ा, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और बाजार में ईंटों की उपलब्धता भी कम हुई है।
लखनऊ और बाराबंकी में नई दरें लागू
बढ़ती लागत और नुकसान की भरपाई के लिए ईंटों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। नई दरों के मुताबिक,
अव्वल (टॉप क्वालिटी) ईंटों की कीमत करीब 25 हजार रुपये प्रति 3000 ईंट हो गई है, जबकि लाल पेटी ईंटों की कीमत लगभग 23 हजार रुपये प्रति 3000 ईंट तक पहुंच गई है।
भट्ठा संचालकों का कहना है कि फिलहाल ये दरें लखनऊ और बाराबंकी में लागू की गई हैं, लेकिन जल्द ही पूरे प्रदेश में कीमतों में वृद्धि देखने को मिलेगी।
पूरे प्रदेश में बढ़ेगी कीमत, नुकसान की भरपाई जरूरी
भट्ठा संचालकों के मुताबिक, मौजूदा हालात में कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गया है। उनका कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और कच्चे माल के नुकसान के कारण बिना कीमत बढ़ाए कारोबार चलाना मुश्किल हो गया है।
शेषमणि तिवारी का कहना है कि प्रदेशभर में ईंटों की कीमतों में वृद्धि होना तय है, क्योंकि हर जिले में भट्ठा संचालक इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
निर्माण कार्यों पर पड़ेगा सीधा असर
ईंटों की कीमत बढ़ने से निर्माण कार्य महंगे होने की संभावना है। ठेकेदारों और बिल्डरों का कहना है कि पहले से ही सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री के दाम ऊंचे हैं, ऐसे में ईंटों की कीमत बढ़ने से कुल लागत और बढ़ जाएगी।
इसका असर मकान बनाने वाले आम लोगों पर भी पड़ेगा, जिनका बजट अब और बढ़ सकता है। भट्ठा संचालकों ने सरकार से मांगी राहत
भट्ठा संचालकों ने सरकार से मांग की है कि कोयले की कीमतों पर नियंत्रण किया जाए और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए राहत दी जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो इसका असर न सिर्फ ईंट उद्योग बल्कि पूरे निर्माण सेक्टर पर पड़ेगा और आने वाले समय में मकान बनाना और महंगा हो सकता है।

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