बुलंदशहर महोत्सव में सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी, लखनऊ द्वारा दास्तानगोई आधारित एक डांस-ड्रामा प्रस्तुत किया गया। इस प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को इतिहास, समाज और स्त्री संघर्षों से परिचित कराया। कार्यक्रम में 1857 की क्रांति को किस्सागोई के माध्यम से जीवंत रूप में मंचित किया गया, जिससे पूरा सभागार ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। संस्था की महासचिव डॉ. सीमा मोदी, जो इस प्रस्तुति की निर्देशिका और प्रमुख किस्सागो भी हैं, ने नवनीत मिश्रा के साथ मिलकर 1857 की क्रांति की कहानी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ. मोदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी में संस्कृति, संघर्ष और क्रांति का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि 1857 की पहली आज़ादी की चिंगारी इसी धरती से उठी थी और उसी स्मृति को जीवित रखने के लिए यह प्रस्तुति तैयार की गई है। मुख्य अतिथि सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार सिंह ने इस अवसर पर कहा कि जब इतिहास केवल किताबों तक सीमित रह जाता है, तो वह महज तारीख बनकर रह जाता है, लेकिन मंच पर जीवंत होने पर वह चेतना का रूप ले लेता है। प्रस्तुति में अज़ीज़न बाई की कहानी ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। पेशे से तवायफ होने के बावजूद उनकी देशभक्ति और साहस ने उन्हें एक क्रांतिकारी के रूप में स्थापित किया, जिससे अंग्रेजी हुकूमत भी भयभीत रहती थी। मंचन में आयुषी गुप्ता ने अज़ीज़न बाई की भूमिका निभाई, जबकि कैफ़ अली खान ने तात्या टोपे, सत्यम सिंह राजपूत ने नाना साहब और अभिषेक शर्मा ने हैवलॉक का किरदार अदा किया। अन्य कलाकारों में अन्वी श्रीवास्तव और मनु आनंद शामिल रहे। संगीत निर्देशन सुब्रत त्रिपाठी और विनायक तिवारी ने किया, जबकि सौम्या आदित्री ने लाइव सिंगिंग प्रस्तुत की। अभिषेक शर्मा ने कॉस्ट्यूम डिज़ाइन किया और अनवारूल हसन ने संगीत संकलन का कार्य संभाला। इस प्रस्तुति की लेखिका अरशाना अज़्मत रहीं, जबकि सम्पूर्ण परिकल्पना और निर्देशन डॉ. सीमा मोदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन परवेज ने किया और राजीव बेताब ने अपने गायन से माहौल को और प्रभावशाली बना दिया।

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