जयगुरुदेव नाम प्रचारक प्रमुख संत बाबा उमाकांतजी महाराज ने कहा कि किसी भी जाति, धर्म व धार्मिक पुस्तकों की निंदा नहीं करना चाहिए। लोगों को जोड़ने का काम करें, तोड़ने का नहीं। धर्मों के बाहरी रीति-रिवाज तो अलग-अलग हैं। लेकिन, आध्यात्मिक दृष्टि से सब मनुष्यों का असली धर्म एक ही है-अपनी जीवात्मा को जीते जी अपने प्रभु तक पहुंचाना। यानी रूह को निजात दिलाना। जब प्रभु के दर्शन हो जाएंगे। ईश्वर से प्रेम हो जाएगा, तो कोई किसी का दुश्मन नहीं रह जाएगा। इस समय जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, आतंकवाद आदि के रूप में जहर तेजी से फैलता जा रहा। सभी वादों को छोड़कर मानववाद ले आओ। वे हवाई अड्डा मैदान में आयोजित दो दिवसीय सतसंग व नामदान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों को प्रवचन सुना रहे थे। उन्होंने अपील की कि मानव तन को अशुद्ध खान-पान- मांस, मछली, अंडा व शराब डालकर गंदा मत करों। कहा कि किसी देश का विकास व आध्यात्मिकता वहां के युवा वर्ग पर निर्भर है। लेकिन, आज के युवा शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन कर अपनी जवानी बर्बाद कर रहें हैं। हमेशा शाकाहारी बनने की कोशिश करों। यह अनमोल शरीर उस प्रभु ने दया-मेहर कर आपको दिया है। यह लाखों-करोड़ों जन्मों में अनगिनत दुख झेलने के बाद मिला है। इस शरीर का उपयोग आप दुनिया की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर सकते हैं। इसे स्वस्थ्य रखने के लिए भोजन की व्यवस्था कर लें। ठंडी, गर्मी व बरसात से बचने के लिए घर बना लें। अपने बच्चों को पढ़ाना-लिखाना व उन्हें योग्य बनाना भी आपका कर्तव्य है। वह भी पूरा कर लें। लेकिन, इन कार्यों में 24 घंटा मत फंसे रहिए। नहीं तो जीवन का यह अमूल्य समय निकल जाएगा। जब एक दिन आंख बंद हो जाएगी, तब दुनिया संसार की कोई चीजें आपके काम नहीं आने वाली। अत: दुनिया के साथ दीन भी कमा लें यानी प्रभु को पाने के लिए भी थोड़ा समय निकाल लें। जयगुरुदेव का यह राष्ट्रीय कार्यक्रम है। पूर्वी चंपारण में आयोजित बिहार में व्यापक स्तर का यह पहला कार्यक्रम है। कार्यक्रम में शामिल होने नेपाल, अमेरिका, मारिशस, लंदन, इंग्लैंड, स्पेन, अफ्रिका, दुबई समेत अन्य देशों के लोग पहुंचे हैं। वहीं भारत में राजस्थान समेत कई राज्यों के श्रद्धालु, जो जयगुरूदेव से जुड़ें हैं वह भी बड़ी संख्या में शिरकत कर रहें। बताया जाता है जयगुरुदेव के बिहार में कुल 10 संभाग हैं। पूर्वी चंपारण व मुजफ्फरपुर मिलाकर एक संभाग हैं। सभी संभाग से जुड़े पदाधिकारी व सदस्य बाहर से आने वाले श्रद्धालु भक्तों के आवासन समेत आदि व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय हैं।
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