बाराबंकी में सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ सहायक को 2012 में आपराधिक मामले में उम्रकैद की सजा मिलने के बाद अब सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई उसी तारीख से प्रभावी मानी गई है। यह मामला 5 जून 2012 का है, जब विशेष न्यायाधीश एस/एसटी एक्ट, बाराबंकी की अदालत ने दिनेश चंद्र को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, एकादश मंडल, सिंचाई कार्य, फैजाबाद ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। दिनेश चंद्र ने इस कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद विभाग को नियमानुसार दोबारा कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए सिंचाई विभाग ने अधीक्षण अभियंता, अयोध्या की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। समिति ने संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया और उपलब्ध अभिलेखों, न्यायालय के निर्णय तथा सेवा नियमों का गहन परीक्षण किया। जांच के उपरांत समिति ने निष्कर्ष निकाला कि दोषसिद्धि के आधार पर दिनेश चंद्र को 5 जून 2012 से ही सेवा से बर्खास्त करना उचित है। समिति की संस्तुति पर अधीक्षण अभियंता ने अब आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। बाढ़ कार्य खंड के अधिशाषी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि इस निर्णय के साथ लंबे समय से लंबित यह मामला अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सेवा नियमों के अनुरूप की गई है और इससे विभाग में अनुशासनात्मक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का संदेश गया है।

Leave a Reply