बागपत की अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सागर, अंकित उर्फ मोटा और सूरज को बरी कर दिया है। यह मामला थाना बालैनी में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 414 के तहत चोरी की मोटरसाइकिलों से संबंधित था। आरोप था कि तीनों आरोपी चोरी की मोटरसाइकिलों के साथ पकड़े गए थे और उन्हें बेचने की फिराक में थे। मामले की सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने अदालत में तीन गवाह पेश किए और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत किया। हालांकि, अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया। सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। बचाव पक्ष के अधिवक्ता समोद कुमार पंवार ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित करने के लिए कोई मजबूत आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कई तथ्य स्पष्ट नहीं थे, जिससे संदेह की स्थिति बनी रही। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, माननीय न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है। इसी आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप सिद्ध न होने के कारण किसी भी प्रकार का अर्थदंड नहीं लगाया जाएगा। इस फैसले के बाद आरोपियों और उनके परिजनों में राहत का माहौल है। इस निर्णय को न्याय प्रक्रिया में साक्ष्यों की अहम भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।

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