DniNews.Live

Fast. Fresh. Sharp. Relevant News

बांका की सिरेमिक फैक्ट्री 40 साल से बंद:1984 में तत्कालीन सीएम ने रखी थी नींव, अब पुनर्जीवन की मांग तेज

बांका के समुखिया मोड़ के पास स्थित सिरेमिक फैक्ट्री कभी औद्योगिक विकास का सपना लेकर खड़ी हुई थी, लेकिन आज यह जर्जर दीवारों और जंग खाई मशीनों के बीच उपेक्षा की प्रतीक बन चुकी है। साल 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह की पहल पर इस परियोजना की नींव रखी गई थी। 32 एकड़ की मूल्यवान सरकारी भूमि पर करोड़ों रुपए खर्च कर रूस से मॉडर्न मशीनें मंगाई गई थीं। दावा किया गया था कि समुखिया मोड़ के आसपास मौजूद चूना-पत्थर और अभ्रक की खदानों पर आधारित यह उद्योग बांका को देश के इंडस्ट्रियल मैप पर नई पहचान दिलाएगा। लोगों में जगी थी रोजगार की उम्मीद शुरुआती वर्षों में फैक्ट्री परिसर में गतिविधियों की हलचल दिखी, रोजगार की उम्मीदें जगीं और स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र का भविष्य माना। लेकिन कुछ ही वर्षों में फैक्ट्री प्रबंधन और सरकारी उदासीनता के कारण हालात बिगड़ने लगे। उत्पादन धीरे-धीरे थम गया और फैक्ट्री बंदी की राह पर चल पड़ी। झाड़ियों और पेड़ों से ढका पड़ा परिसर भारी-भरकम मशीनें, जिन पर करोड़ों रुपए खर्च हुए थे, वर्षों से ऐसे जंग खा रही हैं जैसे वे स्वयं कह रही हों हमसे ज्यादा खराब प्रबंधन तुम्हारा है। आज स्थिति यह है कि पूरा परिसर झाड़ियों और पेड़ों से ढका पड़ा है। भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और सुरक्षा व्यवस्था नाम मात्र की रह गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैक्ट्री अगर सही समय पर ध्यान और संचालन पाती, तो बांका का स्वरूप बदल सकता था। एक बुजुर्ग निवासी का दर्द भरा बयान अगर सरकारी चश्मे में बांका दिखता, तो आज यह हाल नहीं होता इस परियोजना की विफलता की कहानी बयां कर देता है। फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने की मांग हाल के दिनों में फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने की मांग फिर से जोर पकड़ रही है। क्षेत्रीय लोग, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि इसे दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। उनका मानना है कि आज भी यह फैक्ट्री क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास की नई राह खोल सकती है।


https://ift.tt/7pJDS59

🔗 Source:

Visit Original Article

📰 Curated by:

DNI News Live

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *