बलिया में एक महत्वपूर्ण फैसले में, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या 08 ने एक अभियुक्त को 25 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त, अभियुक्त पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक, लखनऊ द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी का परिणाम है। यह मामला थाना पकड़ी में मु0अ0सं0-110/2024 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के अंतर्गत पंजीकृत किया गया था। अभियुक्त की पहचान राजेंद्र चौहान पुत्र स्वर्गीय स्वामीनाथ चौहान, निवासी ग्राम जोगेसरा, थाना पकड़ी, जनपद बलिया के रूप में हुई है। न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत उसे दोषी मानते हुए 25 वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा न करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास होगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत भी अभियुक्त को दोषी पाया गया है। इस धारा में उसे 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। यदि यह अर्थदंड अदा नहीं किया जाता है, तो उसे एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। घटना का संक्षिप्त विवरण यह है कि 24 मई 2024 को वादिनी ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी शौच के लिए बाहर गई थी, तभी विपक्षी ने उसके साथ छेड़खानी और अश्लील हरकतें कीं। छेड़खानी के बाद अभियुक्त ने गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया तो उसे जान से मार देगा। इस शिकायत के आधार पर, स्थानीय पुलिस ने नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्यवाही करते हुए मामले को न्यायालय में प्रस्तुत किया। इस मामले में अभियोजन अधिकारी राकेश कुमार पाण्डेय थे।

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