पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति पर पड़े असर के बीच बरेली प्रशासन ने गैस वितरण का एक नया मॉडल लागू किया है। इस व्यवस्था के तहत, शहर में रह रहे हॉस्टल के छात्रों और प्रवासी मजदूरों को अब पांच किलो के छोटे गैस सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को उनकी मासिक खपत के आधार पर सीमित मात्रा में कॉमर्शियल सिलिंडर दिए जाएंगे। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र और मजदूर हैं जिनके पास नियमित गैस कनेक्शन नहीं हैं। आपूर्ति प्रभावित होने के बाद उन्हें खाना बनाने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इस स्थिति को देखते हुए, शासन ने इन जरूरतमंदों को अस्थायी राहत प्रदान करने के लिए यह विशेष व्यवस्था तैयार की है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई छात्रावास बिना वैध कॉमर्शियल कनेक्शन के ही सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे थे। विशेष रूप से, महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय के नौ छात्रावासों में से केवल दो के पास ही वैध कॉमर्शियल कनेक्शन था, जबकि पांच में बिना अनुमति सिलिंडर पहुंच रहे थे। अब इन सभी स्थानों पर वैध कनेक्शन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उनकी मासिक खपत के आधार पर 20% कॉमर्शियल सिलिंडर ही दिए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी होटल की मासिक खपत 10 सिलिंडर है, तो उसे फिलहाल 2 सिलिंडर ही मिलेंगे। यह कदम आपूर्ति को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रवासी मजदूरों के लिए, संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन को गैस एजेंसी के नाम आवेदन देना होगा, जिसमें श्रमिकों की पहचान और विवरण शामिल होगा। छात्रों को कॉलेज आईडी, आधार कार्ड और किरायानामा या पीजी रसीद के साथ आवेदन करना होगा। सत्यापन के बाद ही सिलिंडर आवंटित किए जाएंगे। प्रशासन के अनुसार, जिले में फिलहाल लगभग 42 हजार घरेलू, 5 हजार छोटे (5 किलो) और 1 हजार कॉमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया, “यह व्यवस्था अस्थायी राहत के तौर पर लागू की गई है ताकि जरूरतमंदों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जा सके।”

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