बरेली में घर में नमाज पढ़ने के चर्चित मामले में बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस अहम मसले की याचिका निस्तारण कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि घर में पूजा और नमाज पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि यह सभी धर्मों के लोगों का मौलिक अधिकार है कि वह पूजा और नमाज अदा करें। हालांकि कोर्ट ने भी कहा कि घर में नमाज बड़ी संख्या में भी बहुत ज्यादा भीड़ जुटाकर न कराई जाए, इससे कानून व्यवस्था में दिक्कत आ सकती है। साथ ही कोर्ट ने बरेली के डीएम, एसएसपी को राहत दे दी। जानिये क्या था पूरा मामला बरेली में घर में नमाज पढ़ने से रोकने और कार्रवाई से जुड़े मामले में जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुए। इस दौरान डीएम और एसएसपी ने अपना पक्ष रखा। कहा कि घर में नमाज पढ़ने से किसी को नहीं रोका गया। यूपी सरकार भी अपना जवाब दाखिल किया। कहा कि घर और मस्जिद में नमाज से किसी को भी नही रोका गया। कार्रवाई कानून व्यवस्था के दायरे में की गई। आशंका के मद़देनजर एक्शन लिया गया।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिका निस्तारित कर दी। जानिए सोमवार को सुनवाई में क्या हुआ था बरेली में घर के भीतर नमाज अदा करने से रोका नहीं गया था। कानून व्यवस्था के मद्देनजर निरोधात्मक कार्यवाही की गई थी। उसके बाद भी नमाज अदा करने से रोका नहीं गया और वहां रोज लगभग 50 लोग नमाज अदा कर रहे हैं। यह बात घर के भीतर नमाज अदा करने से रोकने के मामले में कोर्ट के आदेश पर उपस्थित वहां के डीएम व एसएसपी की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने न्यायालय को बताई। फिर से मौजूद रहेंगे डीएम और एसएसपी न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अपर महाधिवक्ता के अनुरोध पर मामले में सुनवाई के लिए 25 मार्च की तारीख लगाई है और डीएम व एसएसपी को उस दिन भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। सोमवार को देर शाम लगभग एक घंटे तक हुई सुनवाई में एडिशनल एडवोकेट जनरल ने दोनों अधिकारियों की ओर से उनका हलफनामा प्रस्तुत किया। घर में नमाज का मामला 16 जनवरी का साथ ही बताया कि 16 जनवरी को जिस घर में नमाज अदा की जा रही थी, वह याची का घर नहीं है। वह हसीन खान का घर है। वहां दूसरे गांव में मौलवी बुलाकर नमाज अदा की जा रही थी। याची तारिक खान को पूर्व में एक स्थान पर मस्जिद व मदरसा बनाने से रोका गया था। उन्होंने कहा कि याची का यह कहना गलत है कि 16 जनवरी को नमाज अदा करने से रोका गया था। वहां सांप्रदायिक तनाव की स्थिति न बने, इसलिए निरोधात्मक कार्यवाही की गई, जो नमाज अदा होने के बाद कानून व्यवस्था के मद्देनजर की गई थी। यूपी सरकार ने कहा-नमाज से नहीं रोका सरकार की तरफ़ से यह भी कहा कि उसके बाद रमजान के महीने में भी कभी वहां नमाज अदा करने से नहीं रोका गया और न ही वर्तमान में रोका जा रहा है। उनका कहना था कि कोर्ट के आदेश के बाद वहां लगभग 50 लोग बराबर नमाज अदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि याचिका में की गई दो प्रार्थना पूरी हुई हैं नतीजतन याचिका औचित्यहीन हो गई है। बाद में अपर महाधिवक्ता के अनुरोध पर कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 25 मार्च की तारीख लगा दी थी।

Leave a Reply